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10 हज़ार रूपये की फीस पर 6 घंटे की ज़मानत

मुंबई, 18 जून: ( पी टी आई ) नामज़द अदालत ने जुलाई 2006 मुंबई ट्रेन धमाकों के एक मुल्ज़िम की उबूरी ज़मानत की दरख़ास्त को मुस्तरद कर दिया और कहा कि मकोका के तहत मुस्तक़िल या आरिज़ी राहत की कोई गुंजाइश नहीं । ताहम अदालत ने मुहम्मद सज्जाद मर्ग़ूब

मुंबई, 18 जून: ( पी टी आई ) नामज़द अदालत ने जुलाई 2006 मुंबई ट्रेन धमाकों के एक मुल्ज़िम की उबूरी ज़मानत की दरख़ास्त को मुस्तरद कर दिया और कहा कि मकोका के तहत मुस्तक़िल या आरिज़ी राहत की कोई गुंजाइश नहीं । ताहम अदालत ने मुहम्मद सज्जाद मर्ग़ूब अंसारी की दरख़ास्त का इंसानी बुनियादों पर जायज़ा लेते हुए अलील माँ की कल इयादत के लिए एस्कार्ट के साथ 6 घंटों की इजाज़त दी , बशर्ते कि वो दस हज़ार रुपये की रक़म बतौर फीस जमा कराएं।

अंसारी ने कहा था कि उनकी वालिदा बीमार र हैं ओर उन की इयादत के लिए 4 हफ़्तों की उबूरी ज़मानत मंज़ूर की जाये । उन्होंने ये यक़ीन दहानी कराई थी कि अदालत की हर शर्त की वो तामील करने के लिए तैयार हैं। ताहम मकोका कोर्ट के नामज़द जज वाई डी शिंदे ने उन की दरख़ास्त को मुस्तरद करदिया ।

इत्तेफ़ाक़ की बात ये है कि अंसारी की बहन का गुज़श्ता साल इंतेक़ाल हो गया और वो अदालत के हुक्म के बावजूद जनाज़ा में शिरकत नहीं कर सके थे क्योंकि एस्कार्ट पार्टी इन्हें लेने के लिए ताख़ीर से जेल पहुंची थी । चूँकि अंसारी 10 हज़ार रुपय एस्कार्ट फीस अदा करने के मौक़िफ़ में नहीं है इसलिए जमात ए उल्मा महाराष्ट्रा ने उनकी जानिब से ये रक़म जमा करा दी है ताकि कल वो अपनी वालिदा की इयादत कर सकें।

11 जुलाई 2006 को आर डी एक्स से भरे बम सात सब अर्बन ट्रेनों के फ़रस्ट क्लास कम्पार्टमेंट्स में फट पड़े थे जिसके नतीजे में 209 अफ़राद हलाक और 700 ज़ख़्मी हो गए थे ।

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