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100 साला फौजा सिंह का गीनज़ बुक आफ़ वर्ल्ड रिकार्ड में नाम दर्ज

टोरंटो। 18 अक्टूबर ( पी टी आई) हिंदूस्तानी नज़ाद 100 साला फौजा सिंह ने मैराथन का मुकम्मल फ़ासिला तै करते हुए गीनज़ बुक आफ़ वर्ल्ड रिकार्ड में अपना नाम दर्ज कर लिया है। सिंह को ये फ़ासिला तै करने के लिए 8 घंटे लगे और ये कन्या के फ़ातिह केनेथ मि

टोरंटो। 18 अक्टूबर ( पी टी आई) हिंदूस्तानी नज़ाद 100 साला फौजा सिंह ने मैराथन का मुकम्मल फ़ासिला तै करते हुए गीनज़ बुक आफ़ वर्ल्ड रिकार्ड में अपना नाम दर्ज कर लिया है। सिंह को ये फ़ासिला तै करने के लिए 8 घंटे लगे और ये कन्या के फ़ातिह केनेथ मिंगोरा के कामयाबी के 6 घंटे बाद अंजाम दिया जाने वाला कारनाम है। मुक़ाबला का दिलचस्प पहलू ये भी है कि फौजा सिंह मैराथन को मुकम्मल करने वाले आख़िरी शख़्स रहे लेकिन उन्हों ने आख़िरी मुक़ाम हासिल करते हुए भी एक आलमी रिकार्ड क़ायम करदिया। फौजा सिंह ने ये एक इन्फ़िरादी कारनामा 42 कीलोमीटरस का फ़ासिला तै करते हुए किया है। इस आलमी रिकार्ड कामयाबी के बाद सिर्फ पंजाबी में गरफ़तगो करने वाले फौजा सिंह ने कहा कि तक़रीबन 9 घंटों में मुक़र्ररा 42 कीलोमीटरस का मैराथन मुकम्मल करने पर उन्हें ख़ुद हैरानी हुई है। इस मौक़ा पर फौजा सिंह के कोच हरमिंदर सिंह ने कहा कि फौजा सिंह हैरान होने के साथ इस कारनामा पर काफ़ी ख़ुश हैं क्यों कि उन्हों ने वो कारनामा अंजाम दिया है जिस की उन्हों ने ज़िंदगी में ख़ाहिश की थी। उन्हों ने मज़ीद कहा कि आख़िरी लाईन के क़रीब पहुंचने पर फौजा सिंह ने कहा कि इस कारनामा को अंजाम देने पर ऐसी ख़ुशी हो रही है जैसा कि मेरी दुबारा शादी होरही है। आलमी रिकार्ड वाली ये दौड़ फौजा सिंह की 8 वीं दौड़ थी इस से क़बल उन्हों ने 89 की उम्र में पहली मर्तबा मैराथन में शिरकत करते हुए एक नया रिकार्ड क़ायम किया था। 2003 ए- टोरंटो मैराथन में उन्हों ने 90 साल से ज़ाइद के ज़ुमरे में शिरकत की थी। 5 घंटे और 40 मिनट में फ़ासिला तै किया था।

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