जब टाइम्स ऑफ इंडिया के जर्नलिस्ट से दंगाई ने कहा, ‘ज्यादा होशियार मत बनो, बताओ- हिंदू हो कि मुसलमान?’

जब टाइम्स ऑफ इंडिया के जर्नलिस्ट से दंगाई ने कहा, ‘ज्यादा होशियार मत बनो, बताओ- हिंदू हो कि मुसलमान?’

उत्तर-पूर्वी दिल्ली में स्थिति इस तरह नियंत्रण से बाहर हो गईं कि लोगों ने धर्म पूछना शुरू कर दिया और धार्मिक आधार पर मारपीट, हिंसा को अंजाम दिया जाने लगा। टाइम्स ऑफ इंडिया के फोटो जर्नलिस्ट सोमवार को करीब सवा बारह बजे मौजपुर मेट्रो स्टेशन पहुंचे तो हिंदू सेना के एक सदस्य अचानक उनके पहुंचा और उनके माथे पर तिलक लगा दिया। उसने फोटोजर्नलिस्ट से कहा कि इससे उनका काम आसान हो जाएगा। उसने फोटजर्नलिस्ट से कहा, ‘आप एक हिंदू भी हैं भैया। इससे (तिलक से) क्या नुकसान है?’

करीब 15 मिनट बाद इलाके में दोनों ग्रुप एक-दूसरे की तरफ पत्थरबाजी करने लगे। ‘मोदी, मोदी’ के नारों के बीच आसमान में धुएं का गुबार उठता दिखा। फोटोजर्नलिस्ट जैसे ही आग लगी बिल्डिंग की तरफ बढ़े, कुछ लोगों ने उन्हें शिव मंदिर के पास रोक लिया। जब उनसे कहा कि फोटो लेने बिल्डिंग की तरफ जा रहे हैं तो उन्होंने मना कर दिया। उन्होंने फोटोजर्नलिस्ट से कहा, ‘भाई, आप भी तो हिंदू हो। क्यों जा रहे हो? आज हिंदू जाग गया है।’

फोटोजर्नलिस्ट ठिठक गए। कुछ देर बाद बैरिकेड की तरफ चले गए। उन्होंने जैसे ही फोटो लेना शुरू किया, हाथों में डंडे और रॉड लिए कुछ लोगों ने उन्हें घेर लिया। उन्होंने कैमरा छीनने की कोशिश की, लेकिन उनके साथ टाइम्स ऑफ इंडिया का रिपोर्ट साक्षी चांद बीच में आ गए और चीखने लगे। फिर उन लोगों ने छोड़ दिया।

थोड़ी देर उन्हें अहसास हुआ कि वे लोग उनका पीछा कर रहे हैं। एक युवक ने उनसे कहा, ‘भाई, तू ज्यादा उछल रहा है। तू हिंदू है या मुसलमान?’ उन्होंने यहां तक कहा कि धर्म का पता लगाने के लिए वह उनका पैंट उतारकर प्राइवेट पार्ट चेक करेंगे। तब फोटोजर्नलिस्ट ने हाथ जोड़कर कहा कि वह तो एक फटॉग्रफर हैं तो लोगों ने उन्हें छोड़ दिया।

इन डरावने हालात में जब इलाके से निकलने की सोची तो ऑफिस की गाड़ी ढूंढने लगे, लेकिन वह कहीं नहीं मिली। फिर जाफराबाद की तरफ कुछ मीटर पैदल आगे बढ़े। वहां एक ऑटोरिक्शा मिला। ड्राइवर आईटीओ छोड़ने को तैयार हो गया। फोटोजर्नलिस्ट को बाद में महसूस हुआ कि ऑटो ड्राइवर का नाम तो उन्हें खतरे में डाल सकता है। किस्मत देखिए, थोड़ी ही दूर पर चार लोगों ने घेर भी लिया। उन्होंने दोनों के कॉलर पकड़े और ऑटो से बाहर खींचने की कोशिश की। जब फोटोजर्नलिस्ट ने बताया कि वह पत्रकार हैं और ऑटो ड्राइवर बिल्कुल निर्दोष है तो उन्हें निकलने का अनुमति दी गई।

साभार- नवभारत

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