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12-12-12 के बाद जुमेरात को 20-12-2012

इंसानी हयात में तवालत की कोशिशों में मोजज़ाती पेशरफ़्त को मुस्तरद नहीं किया जा सकता, लेकिन ये कहा जा सकता है कि बेशतर लोग जो गुज़िशता 12 बरसों के दौरान बा हयात रहे हैं उनकी ज़िंदगी में 12 तारीख़ एसी आई हैं जो दिन, महीनो और साल के एतबार से यकस

इंसानी हयात में तवालत की कोशिशों में मोजज़ाती पेशरफ़्त को मुस्तरद नहीं किया जा सकता, लेकिन ये कहा जा सकता है कि बेशतर लोग जो गुज़िशता 12 बरसों के दौरान बा हयात रहे हैं उनकी ज़िंदगी में 12 तारीख़ एसी आई हैं जो दिन, महीनो और साल के एतबार से यकसाँ रहें।

शायद उनकी ज़िंदगी में दुबारा एसा मौक़ा ना आए, जैसे एक‌ जनवरी 2001 यह 1-1-01, /2 फरवरी 2002 और इसी तवातर में /12 दिसंबर 2012 हैं। एसा नादिर मौक़ा आइन्दा 88 बरस बाद (एक‌ जनवरी 2101 यह 01-01-01 ) को आएगा। इसी तरह 88 बरस और 39 दिनों बाद /21 जनवरी 2101 (यह 21-01-2101 ) को आएगा, ताहम इसी नवीत की एक और करीबी तारीख जो चार हिन्दसी नंबर को पेश किया जा सकता है जो दो मर्तबा दुहराई गई है (गुज़िशता 11 बरसों में अवाम ने इसी 11 तारीख़ के शाहिद रहे जो /20 जनवरी
2001 ता /20 नवंबर 2011 के दौरान वारिद हुईं।

एसी ही एक दिलचस्प नवीत की तारीख तीन दिन बाद वारिद होगी यानी /20 दिसंबर 2012 यह 20-12-2012 )।शायद ये किसी ना किसी के लिए मुम्किन हो चूँकि अब गैर मुस्लिम लोगों को ये मुम्किन भी नज़र आरहा है चूँकि इनका ये गुमान जाता रहा कि /21 दिसंबर 2012 को क़यामत बरपा होने वाली नहीं है। मुस्लमानों का ये अक़ीदा है कि क़यामत इस /10 मुहर्रम-उल-हराम को वाक़्य होगी जब जुमे का दिन होगा और क़यामत उस वक़्त तक वाक़्य नहीं होगी जब तक हज़रत मह्दी अलैहि अस्सलाम और
हज़रत ईसा अलैहि अस्सलाम का ज़हूर ना होजाए।

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