1984 सिख मुख़ालिफ़ फ़सादाद

1984 सिख मुख़ालिफ़ फ़सादाद

नई दिल्ली ।13 जुलाई: सुप्रीम कोर्ट ने आज 1984 सिख मुख़ालिफ़ फ़सादाद मुआमले में कांग्रेस क़ाइद जगदीश टाईटलर की दाख़िल करदा दरख़ास्त पर ग़ौर करने से इनकार कर दिया जिस में उन्होंने ख़ाहिश की थी ट्रायल कोर्ट ने सी बी आई को उनके ( टाईटलर) रोल के बारे में मज़ीद तहक़ीक़ात करने की जो हिदायत की है उसको चालू रखा जाये ।

जस्टिस पी स़्था सेवम पर मुश्तमिल एक बंच ने कहा कि इस मरहला पर फ़ाज़िल अदालत को इस मुआमले में दख़ल अंदाज़ी करने की ज़रूरत नहीं है क्योंकि ये मुआमला दिल्ली हाइकोर्ट में चालू है जिस पर 18 सितंबर को समाअत होगी । बंच के तीव्र देखते हुए सीनियर ऐडवोकेट मुकुल रोहतगी ने दरख़ास्त से दसतबरदारी पर आमादगी का इज़हार किया जिस की अदालत ने इजाज़त देदी।

जगदीश टाईटलर ने फ़ाज़िल अदालत से रुजू होते हुए हाईकोर्ट के 3जुलाई के हुक्मनामा को चैलेंज किया था। हाइकोर्ट ने ये कहते हुए मज़ीद तहक़ीक़ात को ज़ेर अलतवा रखने से इन‌कार कर दिया था को सिर्फ़ तहक़ीक़ात का हुक्म दिया गया है लेकिन अदालत तहक़ीक़ात को रोक नहीं सकती।

यहां इस बात का तज़किरा एक बार फिर ज़रूरी है कि आँजहानी वज़ीर-ए-आज़म इंदिरा गांधी के ख़ुद उनके सिख सैक्योरिटी गार्ड्स के हाथों 31अक्टूबर 1984 को हुए क़तल के बाद दिल्ली में फ़सादाद फूट पड़े थे जहां सिख ख़ानदानों को चुन चिन्ह कर हलाक किया गया था।

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