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इतिहास के सबसे बड़े ‘जल संकट’ से गुजर रहा है भारत, जल संकट से 2 लाख लोग हर साल मारे जाते हैं

नई दिल्ली : भारत अपने अब तक के इतिहास में ‘सबसे खराब जल संकट’ से जूझ रहा है। भारत की पॉलिसि थींक टैंक की एक रिपोर्ट के मुताबिक सवा सौ करोड़ की आबादी वाले इस देश में 60 करोड़ लोग जल संकट का सामना कर रहे हैं। समय रहते हालात को सुधारने की कोशिशें नहीं हुईं तो 2030 तक यह समस्या और भयंकर रूप ले सकती है। रिपोर्ट से संकेत मिलता है कि कम से कम दो लाख भारतीय हर साल पानी तक अपर्याप्त पहुंच के कारण मर जाते हैं। नए अनुमानों के मुताबिक, संकट 2030 तक खराब होने जा रहा है, जिससे देश की राष्ट्रीय आय में 6% की कमी आई है।

एनआईटीआई अयोग के मुताबिक “भारत अपने इतिहास में सबसे खराब जल संकट से पीड़ित है और लाखों लोगों और आजीविका खतरे में हैं। वर्तमान में, 600 मिलियन भारतीयों को अत्यधिक पानी के तनाव के लिए उच्च सामना करना पड़ता है और सुरक्षित पानी की अपर्याप्त पहुंच के कारण हर साल करीब 200,000 लोग मर जाते हैं।”

जल संसाधन मंत्रालय के अंतर्गत काम कर रहे नेशनल कमीशन फॉर इंटीग्रेटेड वाटर रिसोर्स डेवलपमेंट की एक रिपोर्ट के मुताबिक सन 2050 तक देश में पानी का उपयोग कई गुना बढऩे का अनुमान है, जो तकरीबन 1180 बिलियन क्यूबिक मीटर (बीसीएम) तक हो सकता है। जबकि वर्तमान में देश में पानी की उपलब्धता महज 695 बिलियन क्यूबिक मीटर है। नीति आयोग की ओर से वीरवार को जारी समग्र जल प्रबंधन सूचकांक के मुताबिक जल प्रबंधन के मामले में झारखंड, हरियाणा, उत्तर प्रदेश और बिहार का प्रदर्शन सबसे खराब है। जबकि गुजरात ने जल प्रबंधन के क्षेत्र में सबसे अच्छा काम किया है। इसमें बताया गया है कि गांवों में 84 प्रतिशत आबादी जलापूर्ति से वंचित है, जो पानी उपलब्ध है उसमें भी 70 प्रतिशत प्रदूषित है। वैश्विक जल गुणवत्ता सूचकांक में 122 देशों में भारत 120वें स्थान पर है। देश में 75 प्रतिशत आबादी को पीने के पानी के लिए दूर-दूर तक जाना पड़ता है। इसके बावजूद जल प्रबंधन को लेकर कई राज्य गंभीर नहीं है।

आयोग ने जल प्रबंधन के क्षेत्र में राज्यों में प्रतिस्पर्द्धा बढ़ाने के लिए आज उनकी रैंकिंग जारी की है।आयोग की गुरुवार को जारी समेकित जल सूचकांक रिपोर्ट में नदी विकास, जल संसाधन एवं गंगा संरक्षण मंत्री नितिन गडकरी और नीति आयोग के मुख्य कार्यकारी अधिकारी अमिताभ कांत तथा उपाध्यक्ष राजीव कुमार ने बताया कि इस मामले में गुजरात पहले स्थान पर है। इसके बाद क्रमश: मध्य प्रदेश, आंध्र प्रदेश, त्रिपुरा, हरियाणा और महाराष्ट्र का स्थान रहा है। लेकिन खराब जल प्रबंधन के मामले में झारखंड पहले स्थान पर है। रिपोर्ट वर्ष 2015-16 और 2016-17 के आंकड़ों पर तैयार की गई है।

रिपोर्ट के मुताबिक आगे यह समस्या और विकराल रूप लेने वाली है और पानी की वर्तमान आपूर्ति के मुकाबले 2030 तक आबादी को दोगुनी पानी की आपूर्ति की जरूरत होगी। जिसके चलते करोड़ों लोगों को पानी की गंभीर कमी का सामना करना पड़ेगा और इससे जीडीपी में 6 फीसदी तक की गिरावट दर्ज की जा सकती है।

रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत अपने इतिहास में सबसे खराब जल संकट से पीड़ित है और लाखों लोगों की आजीविका खतरे में हैं। “वर्तमान में 600 मिलियन भारतीयों को अत्यधिक पानी के तनाव का सामना करना पड़ रहा है और सुरक्षित पानी की अपर्याप्त पहुंच के कारण हर साल लगभग दो लाख लोग मर जाते हैं।” पोर्ट के अनुसार, भारत के कृषि क्षेत्र का 52% कृषि क्षेत्र बारिश पर निर्भर है, इसलिए सिंचाई के अच्छे भविष्य के लिए जल संकट पर ध्यान केंद्रित करने की जरूरत है।

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