Monday , December 18 2017

2006ए- से क़बल सबकदोश मुलाज़मीन को छुटे पॆ कमीशन का फ़ायदा

नई दिल्ली 09 नवंबर (एजैंसीज़) साल 2006-ए-से क़बल सरकारी नौकरीयों से सबकदोश होने वाले शहरीयों को राहत पहुंचाते हुए मर्कज़ी इंतिज़ामी इन्साफ़ रसानी कमेटी (कयाट) ने मर्कज़ को हिदायत जारी की हीका छुटे मर्कज़ी पॆ कमीशन की सिफ़ारिशात की बुनियाद पर

नई दिल्ली 09 नवंबर (एजैंसीज़) साल 2006-ए-से क़बल सरकारी नौकरीयों से सबकदोश होने वाले शहरीयों को राहत पहुंचाते हुए मर्कज़ी इंतिज़ामी इन्साफ़ रसानी कमेटी (कयाट) ने मर्कज़ को हिदायत जारी की हीका छुटे मर्कज़ी पॆ कमीशन की सिफ़ारिशात की बुनियाद पर उन के पैंशन अज़सर-ए-नौ तए की जाएगी।

इस अहकाम से ऐसे हज़ारों मुलाज़मीन को राहत मिलेगी, जू 2006-ए-से क़बल सबकदोश हो गए थॆ।

कयाट के सदर जस्टिस वे के बाली की सदारत वाली तीन रुकनी जजॆज् बंच ने 29 अगस्त 2008-ए-को हुकूमत की तजवीज़ को रद्द करदिया, जिस से छुटे पै कमीशन की सिफ़ारिशात में तरमीम की थी। इस कमेटी ने कुछ लोगों और उन की तंज़ीम मर्कज़ी सरकार की पैंशन हासिल करने वाले कमीशन की अर्ज़दाशत पर फ़ैसला सुनाया।

बंच में दो दीगर मैंबरान भी शामिल हैं। बंच ने कहा कि हुकूमत को 2006-ए-से क़बल सबकदोश हुई। सभी मुलाज़मीन को पैंशन यक्म जनवरी 2006-ए-से नाफ़िज़ करने का अज़सर-ए-नौ हिदायत दी जा रही ही। हुकूमतें इस हुक्म नामे की वसूलयाबी के तीन माह के अंदर बकाए की अदायगी करें।

कयाट की हिदायत पर साल 2006-ए-से क़बल सबकदोश हुए ऐस ईल मल्होत्रा ने इस पर अपना तास्सुर पेश करते हुए कहा कि हुकूमत की ख़िदमत वाले हज़ारों सीनीयर सिटीज़न को इस फ़ैसले से फ़ायदा होगा और खासतौर पर मुआशरे के ग़रीब तबक़ात से ताल्लुक़ रखने वाले अफ़राद इस से ज़्यादा मुस्तफ़ीद होंगी। उन्हें वो मिलने वाला है जो इन का हक़ है।

TOPPOPULARRECENT