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2015 मीरकल के लिए मुश्किलात का साल

जर्मन चांसलर एंजीला मीरकल को अपने दौरे इक्तेदार के सबसे बड़े चैलेंज का सामना है। मुख़्तलिफ़ बोहरानों के बीच साल 2016 का आग़ाज़ उनके लिए नए इम्तेहानात भी लाएगा। फॉक्स वैगन और क़ौमी फूटबाल एसोसीएशन के स्कैंडल, युक्रेन का तनाज़ा, यूनान का माली बोहरान, यूरोज़ोन के मसाइल और उस पर मुहाजिरीन का बोहरान।

सन 2015 जर्मनी के लिए एक सख़्त साल साबित हुआ है। जर्मन चांसलर एंजीला मीरकल ने रवां बरस के आग़ाज़ पर यूरोप की मज़बूत तरीन मईशत को तरक़्क़ी की नई राहों पर गामज़न करने का बीड़ा उठाया था।

उस वक़्त बिलख़सूस युक्रेन के तनाज़े पर उनका मोक़िफ़ और सिफ़ारत कारी इंतिहाई सताइश का सबब बनी थी। मीरकल को यूरोप की मलिका के नाम से भी पुकारा गया और आलमी सियासत में उन्होंने अपनी साख को मज़ीद मज़बूत बना लिया।

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