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“2016” विश्व भर के पत्रकारों के लिए कैसा रहा

मीडिया के अधिकारों और स्थिति पर नजर रखने वाली संस्था सीपीजे के अनुसार बीते तीस सालों में 2016 में सबसे ज्यादा देशों की सरकारों ने पत्रकारों को गिरफ्तार कर जेल में डाला है।

गैर लाभकारी संगठन सीपीजे प्रेस की आजादी को सुरक्षित रखने की दिशा में काम करती है। इस रिपोर्ट के अनुसार कुल 259 पत्रकार इस साल जेल में बंद हैं जबकि साल 2015 में यह संख्या 199 थी। संगठन ने सन 1990 से जेल में डाले गए पत्रकारों के आंकड़े दर्ज करना शुरू किया। इनमें गायब हुए, अगवा किए गए या किसी गैरसरकारी तत्व द्वारा कब्जे में लिए गए पत्रकार शामिल नहीं हैं।
चीन में इस साल 1 दिसंबर तक 38 पत्रकार हिरासत में रखे गए थे. रिपोर्ट में लिखा है, “चीन में विरोध प्रदर्शन और मानवाधिकार के उल्लंघन से जुड़े मामले कवर करने वाले पत्रकारों पर ज्यादा कड़ी कार्रवाई हुई है।”

तुर्की में कम से कम 81 पत्रकार जेल में बंद हैं. इन पर सरकार विरोधी होने के आरोप हैं। 15 जुलाई को सरकार के तख्तापलट में साथ देने के संदेह में 100 से अधिक मीडिया संस्थानों को बंद कर दिया गया।

तुर्की और चीन के बाद इस सूची में मिस्र का नाम है जहां 25 पत्रकारों को जेल में बंद रखा गया है। सरकारों का कहना है कि किसी पत्रकार को पत्रकारिता करने के लिए नहीं बल्कि कोई गैरकानूनी काम करने के आरोप में सजा हुई है।

2008 से लेकर 2016 में पहली बार ऐसा हुआ है कि टॉप पांच देशों में ईरान का नाम नहीं आया. कारण ये है कि 2009 में चुनाव के बाद जिन पत्रकारों को सजा सुनाई गई थी, उनमें से कई अपनी सजा काट कर रिहा हो गए हैं।

इस साल जेल में डाले गए पत्रकारों में 20 महिला पत्रकार हैं. भारत के आंकड़े देखें तो सन 1992 से अब तक 27 पत्रकारों की उनकी रिपोर्टिंग के कारण हत्या कर दी गई और अब तक इसके लिए किसी को सजा नहीं हुई है।

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