‘2018 उपचुनाव नतीजे सिर्फ भाजपा के लिए नहीं बल्कि ‘गोदी मीडिया’ के लिए भी एक सबक है’

‘2018 उपचुनाव नतीजे सिर्फ भाजपा के लिए नहीं बल्कि ‘गोदी मीडिया’ के लिए भी एक सबक है’
Click for full image

यूपी-बिहार में उपचुनाव नातीजे आने के बाद न सिर्फ भाजपा को सबक मिला है बल्कि इस के साथ में मीडिया के लिए भी सबक है, जिन्होंने देश में झूठ और नफ़रत की राजनीती और पत्रकारिता की अब कोई जगह नहीं है। सपा-बसपा और आरजेडी ने मीडिया के भी मिथ को तोड़ दिया है।

जिस तरह से मीडिया ने भाजपा के केंद्र सत्ता में आने के बाद पलटी मारी है, उसे देख ऐसा लगने लगा है कि देश का मीडिया ‘मीडिया’ नहीं रहा, बल्कि वो ‘गोदी मीडिया’ हो गया है।

प्रमुख टीवी चैनलों ने 2014 के बाद सभी चुनावों में बीजेपी के साथ ज्यादा समय बिताया है, तो मीडिया पर सवाल उठना सामान्य सी बात है। एक लाइन से देखें तो आज तक, ज़ी न्यूज़, इंडिया टीवी और टाइम्स नाव-रिपब्लिक सभी अपना पत्रकारिता धर्म भूल कर मोदी भक्ति करने में लग गए। इसमें पत्रकारों की तो एक लम्बी फेहरिस्त है।

अब जब बिहार-यूपी के उपचुनाव के नतीजे आए तो मीडिया को मुँह की खानी पड़ी है, क्योंकि मीडिया के सभी पोल और मेहनत को सपा-बसपा और आरजेडी ने बेकार साबित कर दिया है।

बता दें कि मोदी भक्त की लिस्ट में आने वाले ‘जी न्यूज़’ के एंकर रोहित सरदाना ने जब उप चुनाव पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए ट्वीट किया कि बिना क्षेत्रीय दलों के सहारे फ़िलहाल उनकी पूछ नहीं है। छोटी पार्टियाँ- छोटी सोच को किनारे रख के बड़े लक्ष्यों पे ध्यान दें।

रोहित को भाजपा-कांग्रेस और क्षेत्रीय पार्टियों को नसीहत देने की बजाय खुद अपनी पत्रकारिता में झाँकना चाहिए इससे जनता का भला होगा।

Top Stories