Friday , April 20 2018

2019 के लिए सपा-बसपा के गठबंधन पर बोले रामगोपाल यादव- अभी तो बस इंतजार करिए

गोरखपुर और फूलपुर उपचुनाव में जीत के बाद बुधवार शाम को समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव बसपा सुप्रीमो मायावती के घर पहुंचे. यहां दोनों नेताओं के बीच करीब एक घंटे तक मुलाकात चली. मुलाकात के बाद अखिलेश या मायावती ने मीडिया से तो कुछ नहीं कहा, लेकिन इस मुलाकात के कई संदेश निकाले जा रहे हैं.

दोनों पार्टियों के बीच 2019 के लिए गठबंधन बनने के सवाल पर समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता रामगोपाल यादव ने स्पष्ट टिप्पणी तो नहीं की, लेकिन उन्होंने इतना जरूर कहा कि ‘इस बारे में इंतजार करना चाहिए.’ उन्होंने पत्रकारों से कहा कि गोरखपुर और फूलपुर लोकसभा सीटों के उपचुनाव में समाजवादी पार्टी को मिली जीत योगी सरकार के खिलाफ जनमत संग्रह है.

उन्होंने कहा, ‘मैं और मेरी पार्टी बसपा और उसके कार्यकर्ताओं के आभारी हैं कि उन्होंने इन उपचुनावों में सपा उम्मीदवारों को जीत दिलाने के लिए कड़ी मेहनत की. जहां तक 2019 के आम चुनाव का सवाल है तो सिर्फ इंतजार करना ठीक है.’

अखिलेश-मायावती की मुलाकात में दिखी गर्मजोशी

बता दें कि जैसे ही अखिलेश यादव मायावती से मिलने के लिए निकले, बसपा सुप्रीमो के घर से एक गाड़ी उनकी अगवानी के लिए भी पहुंची. यूपी की राजनीति में इन दोनों नेताओं की मुलाकात बेहद अहम है. क्योंकि इसी मुलाकात से 2019 के लिए रास्ता निकलेगा.

इससे पहले यूपी उपचुनाव में बसपा के समर्थन से शानदार प्रदर्शन करने वाली समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर मायावती को शुक्रिया कहा. अखिलेश ने कहा कि बसपा सुप्रीमो मायावती देश के लिए अहम लड़ाई में उनके साथ आई हैं. अखिलेश ने इसके साथ ही यूपी में बीजेपी की सरकार और सीएम योगी आदित्यनाथ पर भी हमला बोला.

उपचुनाव के नतीजों के बाद समाजवादी पार्टी अध्यक्ष अखिलेश यादव ने कहा, ‘मैं दोनों लोकसभा क्षेत्र की जनता का धन्यवाद देना चाहता हूं. सबसे पहले बसपा प्रमुख मायावती जी का भी धन्यवाद देता हूं, उनकी पार्टी के समर्थन के कारण ही इन चुनावों में जीत हासिल हुई है. उनके अलावा जितनी भी पार्टियों ने समर्थन किया है, उनका भी शुक्रिया करता हूं.’

अखिलेश ने कहा कि मुख्यमंत्री का क्षेत्र जो कभी नहीं हारा हो और उपमुख्यमंत्री के क्षेत्र की जनता में ही इतनी नाराजगी है तो बड़े चुनावों में क्या होगा. जीएसटी और नोटबंदी ने कारोबार छीन लिया. पिछले कुछ समय में जो कानून-संविधान की धज्जियां उड़ाई गई हैं उनका ही जवाब मिला है.

अखिलेश बोले कि सदन में मुख्यमंत्री योगी ने कहा था, ‘मैं हिंदू हूं ईद नहीं मनाता हूं. मुझे और बसपा प्रमुख को सांप-छछुंदर का गठबंधन बताया गया. समाजवादी पार्टी को औरंगजेब की पार्टी बताया गया था. ये एक बड़ा संदेश है. बीजेपी ने जो भी वादे किए थे, उनमें से एक भी वादे पर खरे नहीं उतरे हैं. आज की जीत सामाजिक न्याय की जीत है. सपा प्रमुख ने कहा कि बीजेपी देश का नुकसान कर रही है. राष्ट्रवाद के नाम पर जनता को धोखा दिया जा रहा है.’

इससे पहले अखिलेश ने लखनऊ में पार्टी दफ्तर पर विधायकों की बड़ी बैठक बुलाई. बैठक में राज्यसभा चुनाव को लेकर रणनीति पर चर्चा हुई. बता दें कि फूलपुर उपचुनाव में समाजवादी पार्टी ने जीत हासिल की है, जबकि गोरखपुर में उसके पास एक बड़ी लीड है.

बसपा प्रमुख मायावती ने उपचुनावों में विपक्ष के सबसे मजबूत उम्मीदवार का समर्थन किया था. उन्होंने ‘एक हाथ ले और एक हाथ दे’ के फॉर्मूले की बात की थी. बसपा सुप्रीमो ने कहा था कि बसपा उपचुनाव में सबसे सक्षम प्रत्याशी का समर्थन करेगी, क्योंकि पार्टी का उम्मीदवार मैदान में नहीं है. इसके बदले में सपा सहित पूरे विपक्ष को राज्यसभा चुनाव में बसपा का समर्थन करना होगा. बदले में बसपा मध्य प्रदेश में कांग्रेस का समर्थन करेगी.

इसके बाद बसपा कार्यकर्ताओं ने गोरखपुर और फूलपुर में समाजवादी पार्टी के उम्मीदवार के लिए वोट मांगे और इसी का परिणाम है कि सपा उम्मीदवारों ने बीजेपी को पछाड़ दिया है.

मायावती के फॉर्मूले को देखते हुए समाजवादी पार्टी के लिए अब राज्यसभा चुनाव में बसपा प्रत्याशी को जीत दिलवाना महत्वपूर्ण हो गया है. उपचुनाव में सपा-बसपा गठबंधन के आगे बीजेपी धूल धूसरित हो गई है. अखिलेश लंबे समय से यूपी में गठबंधन की बात करते रहे हैं. उपचुनाव के परिणामों को देखते हुए कहा जा सकता है कि वे इसे आगे बढ़ाना चाहेंगे और इसी की खातिर विधायकों की बैठक में रणनीति बनेगी.

यूपी में दिलचस्प हो गया है राज्यसभा चुनाव

उत्तर प्रदेश की 10 सीटों के लिए होने वाले उपचुनाव के लिए बीएसपी के इकलौते उम्मदीवार भीमराव अंबेडकर को जिताने के लिए जहां विपक्ष एकजुट हुआ है, तो वहीं बीजेपी ने 9वें उम्मीदवार के तौर पर अनिल अग्रवाल को उतारकर मुकाबला दिलचस्प बना दिया है. ऐसे में सूबे में एक सीट के लिए चुनाव होना अनिवार्य हो गया है.

बीजेपी ने 9वें उम्मीदवार के तौर पर गाजियाबाद के शैक्षणिक व्यवसायी अनिल अग्रवाल को राज्यसभा का उम्मीदवार बनाया है. बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष महेंद्र नाथ पांडे ने कहा कि पार्टी के पास 8 उम्मीदवार जिताने के बाद 28 वोट अतिरिक्त हो रहे हैं. ऐसे में निर्दलीय विधायकों के साथ मिलाकर हमारे 9वें उम्मीदवार की जीत तय है.

बता दें कि राज्यसभा चुनाव के बहाने प्रदेश में विपक्ष एकजुट हुआ है. बसपा अकेले अपने 19 विधायकों के दम पर राज्यसभा चुनाव नहीं जीत सकती. ऐसे में सपा, कांग्रेस और रालोद ने उसे समर्थन का ऐलान कर दिया है. इसके बाद बसपा प्रत्याशी भीमराव अंबेडकर के राज्यसभा पहुंचने की राह में बीजेपी के 9वें उम्मीदवार ने रोड़ा अटका दिया है.

8 बीजेपी, एक सपा और एक सीट पर मुकाबला

यूपी विधानसभा में सदस्यों की संख्या 403 है, जिनमें 402 विधायक 10 राज्यसभा सीटों के लिए वोट करेंगे. राज्यसभा चुनाव जीतने के लिए एक सदस्य को 37 विधायकों का समर्थन चाहिए. इस आंकड़े के मुताबिक बीजेपी गठबंधन के खाते में 8 और 47 विधायकों वाली सपा के खाते में एक सीट तय है.

10वीं और आखिरी सीट के लिए सपा के 10 अतिरिक्त वोट, बीएसपी के 19, कांग्रेस के 7 और 3 अन्य के साथ मिलकर एक उम्मीदवार को जिता सकते हैं. बीजेपी ने अभी तक 8 उम्मीदवारों का ऐलान किया है, जिनकी जीत पक्की है. जबकि विपक्ष की ओर से सपा ने जया बच्चन को उम्मीदवार बनाया है, उनकी भी जीत तय है.

 

बीजेपी ने अनिल अग्रवाल को उतारकर बसपा उम्मीदवार भीमराव अंबेडकर के सामने दिक्कत खड़ी कर दी है. सपा, कांग्रेस और आरएलडी के समर्थन के बाद अब उनकी भी जीत तय मानी जा रही थी. लेकिन अब चुनाव होने है. माना जा रहा है कि बीजेपी अपने 9वें उम्मीदवार के लिए निर्दलीय विधायकों को साथ लाकर विपक्ष की एकजुटता को फेल करने रणनीति बनाई है.

राज्यसभा का गणित

राज्यसभा चुनाव के लिए एक तय फॉर्मूला है, खाली सीटों में एक जोड़ से विधानसभा की कुल सदस्य संख्या से भाग देना. निष्कर्ष में भी एक जोड़ने पर जो संख्या आती है. उतने ही वोट एक सदस्य को राज्यसभा चुनाव जीतने के जरूरी होता है. अगर यूपी का उदाहरण लिया जाए तो 10 सीटों में 1 जोड़ा जाए तो योग हुआ 11. अब 403 को 11 से भाग देते हैं तो आता है 36.63. इसमें 1 जोड़ा जाए तो योग होता है 37.63. यानी यूपी राज्यसभा चुनाव जीतने के लिए एक सदस्य को 38 विधायकों का समर्थन चाहिए. हालांकि चूंकि एक विधायक का निधन हो चुका है इसलिए यहां 37 विधायकों के समर्थन से ही राज्यसभा उम्मीदवार की जीत तय हो जाएगी.

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