Friday , December 15 2017

2019 चुनाव में बड़ी जीत का दावा हो सकता है ‘जुमला’ साबित

अगर आप भारत में मौजूदा परिस्थितियों पर नज़र डाले तो 2014 चुनाव में मोदी की लहर से कहीं अलग परिस्थिति नजर आयेंगे। अमित शाह ने जो दावा किया है, उस दावे में जुमला नजर आ रही है।

बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष के दावे में सिर्फ़ हताशा है। ऐसा लगता है कि अमित शाह को भी महसूस हो गया है कि बीजेपी के लिए 2019 का चुनाव जितना आसान नहीं है।

मगर आप कैसे भूल सकतें हैं कि बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष के पास जुमला जैसे शब्द भी है। अपने कार्यकर्ताओं और पार्टी नेताओं में हौसला बढ़ाने के लिए इसका इस्तेमाल तो कर ही सकते हैं। राजनीति में जनता से वादे करके नहीं निभाने को जुमला कहते है, यह सिर्फ अमित शाह ने ही बताया है।

मतलब अमित शाह ने यह बताया कि आप भोली-भाली जनता से खुब बड़े- बड़े वादे किजिये और जब जनता किये गये वादे के बारे में पुछे तो आसानी से उसे जुमला बताकर निकल लिजिए। पर जनता तो समझती है साहेब।

शायद ऐसा हो कि 2019 लोकसभा चुनाव में जनता आपसे भी वोट देने का खुब इशारा बताये और रिजल्ट कुछ और निकले! शायद यही जुमला तो नहीं!

खैर जनता जवाब देने के लिए तैयार हो चुकी है। देश की जनता को शायद अब हर बात अमित शाह की जुमला ही लगता हो। देश की जनता के सामने काफी समस्याएं हैं जिसको वो झेल रही है। मोदी सरकार के तीन सालों में जो देश ने देखा है, जनता को शायद इसकी उम्मीद कभी नहीं रही होगी।

नोटबंदी से कौन सी कामयाबी हासिल हुई है, यह आज तक जनता को समझ नहीं आया है। मतलब आप इसको असफल ही कह सकते हैं। GST की मार हर छोटे कारोबारियों को झेलनी पड़ रही है, यह हर कोई समझने लगा है।

आये दिन लगातार रेलवे की सुरक्षा पर उठ रहे हैं, रेल दुर्घटना के कारण रेल मंत्री बदल दिए गए मगर रेल हादसे नहीं रुक रहे हैं। बेरोजगारी की समस्या तो देश की सबसे बड़ी समस्या है। 2014 में युवाओं ने खुब चढ़ कर मोदी पर भरोसा करके वोट दिया कि रोजगार मिल जायेंगे। लेकिन हताशे का दौर अभी जारी है।

असहिष्णुता पर जिस तरह के माहौल बना दिया गया यह किसी ने छुपा नहीं है। अल्पसंख्यकों और दलितों पर जिस प्रकार अत्याचार बढ़ती चली गई यह सभी जानते हैं।

देश के सामने जिस प्रकार विश्वविद्यालय में घटती हुई घटनाएं है, छात्र के आक्रोश को कौन संभालेगा। जेएनयू की घटना से लेकर हैदराबाद यूनिवर्सिटी में दलित स्कॉलर रोहित बेमुला की घटना ने किसको नहीं झकझोर दिया होगा। यकीनन भक्तों को तो नहीं!

गौरक्षा के नाम पर हिंसा और गौरक्षकों की गुंडागर्दी से कौन वाकिफ़ नहीं है। ऐसे में 2019 में 2014 से बड़ी जीत का दावे को आप क्या कहेंगे? मुझे तो केवल हताशा ही नजर आते हैं। केवल अपने कार्यकर्ताओं और खुद को झूठा दिलासा दिखाई दे रहा है।

आपको बता दें कि बीजेपी की राष्ट्रीय कार्यकारिणी में पार्टी अध्यक्ष अमित शाह ने दावा किया कि 2019 लोकसभा चुनाव में एनडीए की पहले से बड़ी जीत होगी।

अब्दुल हमीद अंसारी
(यह मेरे निजी विचार है)

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