2019 लोकसभा चुनाव: अब मोदी के सामने खड़ा हो गया बहुत बड़ा नेता!

2019 लोकसभा चुनाव: अब मोदी के सामने खड़ा हो गया बहुत बड़ा नेता!

पांच राज्यों में हुए विधानसभा चुनाव के नतीजों का हर विश्लेषण आखिरकर अगले साल होने वाले आम चुनाव पर ही जाकर टिकता है. खास तौर से मोदी बनाम राहुल की बहस और तेज हो गई है
पिछले चार साल के दौरान कई राज्यों में सत्ता गंवाने वाली कांग्रेस पार्टी के लिए तीन राज्यों के चुनाव नतीजे एक संजीवनी की तरह हैं. ऐसे में वो यह भी भूल सकती है कि मिजोरम की सत्ता गंवाने के साथ ही पूर्वोत्तर में उसका ‘सफाया’ हो गया है.

वहीं दूसरी ओर भारतीय जनता पार्टी इस हार को भले ही ऊपरी तौर पर ‘सदमे की तरह’ ना दिखा रही हो लेकिन भीतरी स्थिति ये है कि उसकी जड़ें उन राज्यों में हिलनी शुरू हो गई हैं जिनकी बदौलत साल 2014 में उसे लोकसभा में ऐतिहासिक बहुमत मिला था.

पांच राज्यों में हुए विधानसभा चुनाव में कांग्रेस ने जहां छत्तीसगढ़ में 15 साल से सत्तारूढ़ बीजेपी सरकार को एकतरफा पटकनी दी है वहीं राजस्थान में भी वह वापसी करने में सफल रही है. हां, मध्य प्रदेश में थोड़ी कमी जरूर रह गई है लेकिन माना यही जा रहा है कि वहां भी आखिरकार बहुजन समाज पार्टी और समाजवादी पार्टी के विधायकों की बदौलत सरकार बना लेगी.

मिजोरम में कांग्रेस पार्टी को लगभग उसी तरह का झटका और दस साल तक सत्ता में रहने से सरकार विरोधी लहर का खामियाजा भुगतना पड़ा है जैसा छत्तीसगढ़ में भाजपा को. मिजो नेशनल फ्रंट ने लगभग दो तिहाई सीटें जीतकर उसे सत्ता से बाहर कर दिया और तेलंगाना में टीआरआएस ने दोबारा सत्ता में वापसी करके कांग्रेस और तेलुगुदेशम गठबंधन का सत्ता में आने का सपना चकनाचूर कर दिया.

पांचों राज्यों के विधानसभा चुनावों को अगले साल होने वाले आम चुनाव का सेमीफाइनल माना जा रहा था. राजनीतिक दलों ने भी चुनाव उसी रणनीति और ऊर्जा से लड़ा और नतीजों के बाद उसकी व्याख्या भी उसी अनुसार हो रही है. हालांकि मध्य प्रदेश के अलावा अन्य किसी राज्य के परिणाम उम्मीद के मुताबिक नहीं रहे, खासकर छत्तीसगढ़ और राजस्थान के.

कांग्रेस पार्टी पर नजर रखने वाले वरिष्ठ पत्रकार रशीद किदवई कहते हैं, “इन नतीजों ने कांग्रेस पार्टी और राहुल गांधी के आत्मविश्वास को मजबूत किया है और बीजेपी का विजय रथ रुकने से उसके आत्मविश्वास को डिगाया भी है. लेकिन सबसे अहम बात यह है कि राजस्थान में पांच साल और मध्य प्रदेश में पंद्रह साल की सत्ताविरोधी लहर के बावजूद बीजेपी उतना पीछे नहीं है, जितना कि सोचा जा रहा था.”

साभार- ‘डी डब्ल्यू हिन्दी’

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