Friday , September 21 2018

2019 लोकसभा चुनाव में मिला मोदी बनाम विपक्षी का फॉर्म्युला, बीजेपी के लिए मुश्किल!

विपक्षी रणनीतिकारों का कहना है कि मोदी और भारतीय जनता पार्टी के विजय अभियान को रोकने का सिर्फ यही तरीका है कि 2019 के चुनाव को “मोदी बनाम बाकी” कर दिया जाए. यह रणनीति थोड़ी कारगर होती दिख रही है.

उत्तर प्रदेश के उपचुनाव में दो प्रमुख विपक्षी दलों समाजवादी पार्टी और बहुजन समाज पार्टी ने मिल कर चुनाव लड़ा और नतीजा यह हुआ कि जाति और धार्मिक गुटों में बंटे इस राज्य में बीजेपी दो अहम सीटों पर चुनाव हार गई. इसमें गोरखपुर की हार तो और भी शर्मनाक है क्योंकि 1989 से ही वहां बीजेपी का दबदबा था और यह मुख्यमंत्री आदित्यनाथ की सीट रही है.

पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने उत्तर प्रदेश और बिहार में क्षेत्रीय पार्टियों की जीत को मोदी की पार्टी के “खात्मे की शुरुआत” कहा है. कांग्रेस पार्टी भी इस मौके को भुनाने में लगी है.

पार्टी के अध्यक्ष राहुल गांधी ने कहा, “उपचुनाव के नतीजों से यह साफ है कि मतदाता बीजेपी से काफी नाराज हैं और वे उन गैर बीजेपी उम्मीदवारों को वोट देंगे जिनके जीतने की उम्मीद है.” कांग्रेस ने तो विरोधी दलों को साथ लाने की कोशिश भी शुरू कर दी है.

कांग्रेस पार्टी की तरफ से विपक्षी नेताओं के लिए एक रात्रिभोज का आयोजन भी इसी मकसद से किया गया. कांग्रेस प्रवक्ता रणदीप सिंह सुरजेवाला का कहना है कि पार्टी क्षेत्रीय दलों के किसी भी गुट का नेतृत्व करने के लिए तैयार है और इसी हफ्ते पार्टी के सम्मेलन में इस पर चर्चा की जाएगी.

उधर उपचुनाव में हार के बाद कंधे से धूल झाड़ रही बीजेपी का कहना है कि दो क्षेत्रीय पार्टियों की एकता को उसने कम करके आंका और यही वजह थी कि उसकी हार हुई.

उत्तर प्रदेश के उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य का कहना है, “हम खुद को उस स्थिति के लिए तैयार करेंगे जिसमें बीएसपी, एसपी और कांग्रेस साथ आएंगे. इसके साथ ही 2019 के चुनावों में जीत के लिए भी रणनीति तैयार की जाएगी.”

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