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25000 दे दो वर्ना……….

तुम्हें दहश्तगर्द क़रार दिया जाएगा

तुम्हें दहश्तगर्द क़रार दिया जाएगा

मुल्ज़िम को सब इन्सपैक्टर की धमकी, मुंबई पुलिस कमिशनर से शिकायत

मुंबई, ०४ फ़रवरी (एजैंसीज़) मुंबई पाईधोनी पुलिस स्टेशन से वाबस्ता एक सब इन्सपेक्टर को डोंगरी के एक डाक्टर के ख़िलाफ़ जाली करंसी नोटों का मुक़द्दमा दर्ज ना करने की लालच के तौर पर इस से बतौर रिश्वत 25 हज़ार रुपय तलब और क़बूल करते हुए कैमरा मैं फ़िल्म बंद कर लिया गया।

मुंबई पुलिस कमिशनर को पेश कर्दा अपनी शिकायत में डाक्टर फ़ैज़ान ख़ान ने इल्ज़ाम आइद किया कि पाईधोनी के सब इन्सपैक्टर सदम सनाब उन्हें डरा धमकाते हुए कहा है कि अगर वो इस को 25 हज़ार रुपय बतौर रिश्वत अदा करने से इनकार करता है तो इस को दहश्तगर्द क़रार दिया जाएगा और एक दूसरे दहश्तगर्द के साथ जाली करंसी के रैकेट में मुलव्वस होने का मुक़द्दमा दर्ज किया जाएगा। फ़ैज़ान ने शिकायत में मज़ीद कहा है कि सदम सनाब मेरे एक माज़ी के एक केस का फ़ायदा उठाने की कोशिश कर रहा है।

गुज़श्ता साल अप्रैल में पाईधोनी पुलिस ने मुझे गिरफ़्तार किया था जब मेरे क़ब्ज़ा से दो जाली नोट बरामद हुए थे। लेकिन इस के बाद 9 माह गुज़र चुके हैं। उन्हों ने कोई चार्ज शीट पेश नहीं की। फ़ैज़ान ने मज़ीद कहाकि हाल ही में वो सनाब से मुलाक़ात के लिए गया था जहां इस ने मुझे धमकी दी कि 25 हज़ार रुपये ना देने की सूरत में इस के चार्ज शीट में एक दहश्तगर्द फ़रार की तरफ़ से तहरीर करदा मकतूब को मुंसलिक कर देगा और ख़ुद इस (फ़ैज़ान) को भी दहश्तगर्द क़रार दिया जाएगा।

लेकिन पाई धोनी पुलिस ने इन्किशाफ़ किया है कि इन के पास ऐसा कोई मकतूब नहीं है।

खु़फ़ीया कैमरा से फ़िल्म बंद करदा मुकालमात के इक़तिबासात

फ़ैज़ान : सर वो ज़रार वाला लेटर आप चार्ज शीट में तो नहीं डालेंगे? वो में डर रहा था सर

सनाब : पढ़ा क्या आप ने वो लेटर? आपका एक कापी रखा था, मालूम नहीं वो किधर गया। पढ़ने का है क्या (फिर) कापी निकाल कर दूं?
फ़ैज़ान : नहीं , नहीं सर।

सनाब: मांगता है तो कापी मंगा देता हूँ।

फ़ैज़ान : सर एक रिक़्वेस्ट (दरख़ास्त) है सर। आप ने 25 हज़ार बोला था ना?

सनाब: हाँ

फ़ैज़ान: तो अभी हो नहीं पाए हैं। कल ना मै‍ आऊँगा।

सनाब: मैंने आपको (पैसे) रखने को नहीं दिया। मैंने आपको क़र्ज़ नहीं दिया। ये प्यार मुहब्बत की बात है। प्यार मुहब्बत से चले तो अच्छा है। अभी कितना किया है?

फ़ैज़ान: अभी तो नहीं लाया। कल लेके आऊँगा।

कल कितना लाऊँगा: तीन हज़ार?

सनाब: देखो में आप को क्या बोला। दिल को तसल्ली मांगता है। कभी भी पाँच साल के बाद, 10 साल के बाद, फ़ैज़ान अपने गांव चला जाएगा। मेरी भी डयूटी ख़तम हो जाएगी लेकिन याद तो आएगा ये चीज़ फ़ैज़ान की है।

सब इन्सपैक्टर का मौक़िफ़ इस बात से मुख़्तलिफ़ है। सनाब का कहना है कि फ़ैज़ान एक मुल्ज़िम है और इस का मुक़द्दमा मेरी निगरानी में है। गुज़श्ता दो माह से वो मुझसे मिलने की कोशिश कर रहा था। बिलआख़िर मैंने उस को पुलिस स्टेशन आने की इजाज़त दी थी और इसने इस मुक़द्दमा को सुस्त रवी से चलाने केलिए मुझे ये पेशकश की थी।

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