Thursday , December 14 2017

2G स्पेकट्रम मुआमला में चिदम़्बरम को शामिल करने की ख़ाहिश

सदर जनता पार्टी सुब्रामणियम स्वामी ने 2G स्पेकट्रम मुक़द्दमा की समाअत कर रही दिल्ली अदालत को बताया कि वो एयरसेल - मैक्सेस (Aircel-Maxis)मुआमलत से मुताल्लिक़ मुक़द्दमा में निजी शिकायत दर्ज करायेंगे।

सदर जनता पार्टी सुब्रामणियम स्वामी ने 2G स्पेकट्रम मुक़द्दमा की समाअत कर रही दिल्ली अदालत को बताया कि वो एयरसेल – मैक्सेस (Aircel-Maxis)मुआमलत से मुताल्लिक़ मुक़द्दमा में निजी शिकायत दर्ज करायेंगे।

उन्होंने ख़ुसूसी सी बी आई जज ओ पी सावनी को बताया कि सी बी आई एयरसेल-मैक्सेस मुआमलत की तहक़ीक़ात कर रही है लेकिन वो इस मुआमला में इज़ाफ़ी शिकायत दर्ज कराने के ख़ाहां हैं।

उन्होंने बताया कि वज़ीर-ए-दाख़िला पी चिदम़्बरम के ख़िलाफ़ इससे पहले उन्होंने जो इल्ज़ामात आइद किए थे इस बारे में वो अलैहदा शिकायत दर्ज करायेंगे । सी बी आई साबिक़ वज़ीर टेलीकॉम दयानिधि मारन के एयरसेल । मैक्सेस मुआमलत में मुबय्यना रोल की तहक़ीक़ात कर रही है।

अदालत ने इस मुक़द्दमा की आइन्दा समाअत (सुनवायी/ तारीख) 25 अगस्त को मुक़र्रर (तय) की है। क़ब्लअज़ीं स्वामी ने सुप्रीम कोर्ट को जो इस मुक़द्दमा की समाअत कर रही है, बताया था कि एयरसेल – मैक्सेस मुआमलत में सी बी आई सिर्फ़ मारन के रोल पर तवज्जा मर्कूज़ किए हुए है। उन्होंने कहा कि इनका मुआमला सी बी आई के मुक़द्दमा से बिलकुल जुदागाना है।

एयरसेल-मैक्सेस मुआमला में सी बी आई की जानिब से अलैहदा एफ़ आई आर दर्ज कराई गई। सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि तहक़ीक़ात को वुसअत दी जानी चाहीए। चुनांचे सुब्रामणियम स्वामी ने अदालत को बताया कि इस मुआमला में इज़ाफ़ी शिकायत दर्ज कराना चाहते हैं।

जब जज ने कहा कि कोई भी शख़्स ख़ानगी शिकायत दर्ज करा सकता है तब सुब्रामणियम स्वामी ने कहा कि ये मुआमला फ़ौरन प्रोमोशन बोर्ड से मुताल्लिक़ है। 2004 और 2008 के दरमयान बहैसीयत वज़ीर फायनेन्स पी चिदम़्बरम इस बोर्ड के सदर नशीन थे। सुब्रामणियम स्वामी ने इस मुआमले की समाअत ( सुनवायी) मुल्तवी करने की ख़ाहिश करते हुए कहा कि उन की दरख़ास्त( आवेदन) पर सुप्रीम कोर्ट का फ़ैसला ज़ेर तसफ़ीया है।

4 फरवरी 2012 को आप (जज) ने एक फ़ैसला सुनाया था जिस में इन की दलील से उसूली इत्तेफ़ाक़ किया गया था चुनांचे वो सुप्रीम कोर्ट से रुजू हुए और इस ने अपना फ़ैसला महफ़ूज़ रखा है। चुनांचे वो अदालत हज़ा से मुक़द्दमा की समाअत ( सुनवायी) मुल्तवी करने की दरख़ास्त करते हैं।

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