Friday , December 15 2017

सोहराबुद्दीन एनकाउंटर मामले की सुनवाई कर रहे CBI जज की मौत पर परिजनों का ख़ुलासा

सोहराबुद्दीन केस में मुंबई के केंद्रीय जांच ब्यूरो विशेष अदालत की अध्यक्षता कर रहे 48 वर्षीय न्यायमूर्ति ब्रिजगोपाल हरकिशन लोया की नागपुर में मौत हो गई थी. उनकी मौत के बारें में अब उनके परिजनों ने बड़ा खुलासा किया है. हालांकि उनकी मौत दिल का दौरा पड़ने से हुई थी.

लोया की भतीजी, नूपुर बालप्रसाद बियानी ने उनकी मौत के बारें में बताया कि 30 नवंबर 2014 को 11 बजे नागपुर से, लोया ने अपनी पत्नी शर्मिला को फ़ोन किया था, जिसमे उन्होंने उस दिन के उनके व्यस्त कार्यक्रम के बारें में उन्हें बताया था. करीब 40 मिनट की बातचीत में उन्होंने बताया था कि वे अपने एक साथी न्यायाधीश की बेटी सपना जोशी की शादी में भाग लेने के लिए नागपुर पहुंचे है.

नुपुर का कहना है कि शुरू में उनका वह जाने का इरादा नहीं था, लेकिन उनके दोनों न्यायाधीशों ने जोर देकर उनके साथ चलने के लिए कहा था. लोया ने उस दौरान अपनी पत्नी को बताया कि उन्होंने शादी में भाग लिया, और बाद में एक स्वागत समारोह में शामिल हुए. उन्होंने अपनी पत्नी से अपने बेटे अनुज के बारे में भी पूछताछ की थी .

इस दौरान उन्होंने अपनी पत्नी को बताया कि वह नागपुर के सिविल लाइंस इलाके में  एक सरकारी अतिथि गृह रवि भवन में रुके है. नुपुर ने कहा कि लोया के साथ उनकी यह आखिरी बातचीत थी. अगले दिन उनके परिवार को उनकी मौत की खबर मिली.

उनकी मौत के बारे में जानकारी देते हुए कहा गया कि कार्डियक अरेस्ट के चलते उनकी मौत हो गई. हालांकि हमें बताया गया था कि उन्हें छाती में दर्द हो रहा था, इसलिए उन्हें ऑटो रिक्शा से नागपुर के एक निजी अस्पताल ले जाया गया जहां कुछ दवाएं दी गईं. हालांकि बाद में पता चला कि वहां पर ईसीजी” – सुविधा काम नहीं कर रही थी. बाद में, लॉया को मैडिटरीना अस्पताल स्थानांतरित किया गया, जहां उन्हें मृत घोषित कर दिया गया.

नुपुर का कहना है कि लोया के मृत्यु से जुड़े दस्तावेजों में कई विसंगतिया है. उनकी पोस्टमार्टम दस्तावेज पर लोया के पिता के चचेरे भाई के हस्ताक्षर होने का दावा किया गया लेकिन ये किसी अन्य किसी व्यक्ति द्वारा किये गए फर्जी हस्ताक्षर थे.

पोस्टमार्टम रिपोर्ट और उनकी मौत का समय मेल नहीं खा रहा है. उन्होंने बताया, परिवार ने लोया की मौत की जांच करने के लिए एक जांच आयोग की मांग की थी, लेकिन इसे कभी भी पूरा नहीं किया गया.

रहे सोहराबुद्दीन का मामला ऐसा एकमात्र मामला था, जिसे लोया सुन रहे था. इस केस में उन्होंने आरोपी बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह को 6 जून 2014 को दण्डित भी किया था

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