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पश्चिम बंगाल के मदरसों में तालीम हासिल कर रहे 5 % छात्र हिन्दू हैं

पश्चिम बंगाल बोर्ड ऑफ मदरसा एजुकेशन (डब्ल्यूबीबीएमई) की 12वीं की रिजल्ट पिछले दिनों घोषित हो गया। इस साल कुल 52,115 छात्रों ने परीक्षा में हिस्सा लिया। इसमें से 2,287 यानी 4.38% हिंदू छात्र थे।

मदरसा बोर्ड के अध्यक्ष आबिद हुसैन ने बताया कि डब्लूबीबीएमई से 512 हाई मदरसा और जूनियर हाई मदरसा जुड़े हुए हैं। उन्होंने बताया कि मदरसों में पढ़ने वाले हिंदू छात्र लगभग 5 फीसद है।

उन्होंने बताया कि इस मदरसों में सात विषयों- बंगाली, उर्दू, अंग्रेजी, गणित, भौतिक विज्ञान, जीवन विज्ञान, इतिहास और भूगोल की पढ़ाई होती है।

इसके अलावा अरबी और इस्लामियात भी पढ़ाया जाता है। आबिद हुसैन ने बताया, “एक छात्र को एक वैकल्पिक विषय के रूप में इस्लाम का अध्ययन या अरबी को चुनना होता है। कई छात्र इस्लामियात तो नियमित विषय के रूप में चुनते हैं क्योंकि इसमें अरबी से थोड़ा अधिक स्कोरिंग होता है।”

हालाँकि राज्य में मदरसा बोर्ड की शुरुआत 1927 से ही हो गई थी लेकिन इसे सरकारी मान्यता सूबाई विधानसभा में 1994 में अधिनियम पारित कर दी गई।

इस साल मदरसा बोर्ड के एग्ज़ाम में शामिल होने वाले 2287 हिन्दू छात्रों में 930 अनुसूचित जाति से थे, वहीँ 311 अनुसूचित जनजाति से. इसी तरह पिछले साल कुल हिन्दू छात्रों में एससी और एसटी छात्रों की संख्या 71.01% थी।

रिपोर्ट के मुताबिक़, पूरे राज्य में करीब 512 मदरसा मौजूद हैं, जिसमे से कईयों में मुस्लिम छात्रों से ज्यादा हिन्दू छात्र तालीम हासिल कर रहे हैं।

मसलन हूरा थाना मुज़फ्फ़र अहमद अकादमी हाई मदरसा में जहाँ हिन्दू छात्रों की संख्या 1020 है, वहीं मुस्लिम छात्र महज़ 700 ही हैं।

इसी तरह ऑरग्राम चतुस्पल्ली हाई मदरसे में 962 हिन्दू छात्र हैं और 319 छात्र मुस्लिम।

इसके अलावा इस साल बोर्ड एग्ज़ाम में बैठने वाले 52,115 छात्रों में 36276 लड़कियां थीं जोकि कुछ स्टूडेंट्स का 70 फीसदी है।

डब्ल्यूबीबीएमई के सेकेट्री रेजानुल तप्दार ने बताया कि ग्रामीण इलाकों में गार्जियन लड़कियों को स्कूल के बजाय मदरसा भेजना पसंद करते हैं। दरअसल वह स्कूल की को-एजुकेशन को पसंद नहीं करते।

ऑरग्राम चतुस्पल्ली के रिटायर्ड हेडमास्टर अनवर हुसैन ने बताया कि यहाँ के कई गावों में 14 साल की उम्र में आते-आते लड़के मदरसे की पढाई छोड़ दूसरे राज्य कमाने निकल जाते हैं, लेकिन लड़कियां अपनी शादी तक पढाई जारी रखती हैं।

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