Wednesday , September 19 2018

58 बरस से लंदन मे क़ियाम, हैदराबादी होने और हैदराबादी तहज़ीब पर फख़र

ममुल्कत आसिफ़िया के हुक्मरानों ने जिस तरह रियाया की ख़िदमत को अपना शआर बनाया, इसी तरह इस ख़ानदान से ताल्लुक़ रखने वालों ने आज भी अवामी ख़िदमात की अपनी रवायात को बरक़रार रखा है। ख़ानदान आसिफ़िया के इन ही रवायात के एक पासबान प्रिंस

ममुल्कत आसिफ़िया के हुक्मरानों ने जिस तरह रियाया की ख़िदमत को अपना शआर बनाया, इसी तरह इस ख़ानदान से ताल्लुक़ रखने वालों ने आज भी अवामी ख़िदमात की अपनी रवायात को बरक़रार रखा है। ख़ानदान आसिफ़िया के इन ही रवायात के एक पासबान प्रिंस मुहसिन अली ख़ांन हैं जो गुज़िश्ता तक़रीबन 58 बरस से लंदन में मुक़ीम हैं और वहां अवामी ख़िदमात के तसलसुल को जारी रखे हुए हैं। प्रिंस मुहसिन अली ख़ांन इस तवील अर्सा से हिंदुस्तान से दूरी के बावजूद हैदराबाद, उस की तहज़ीब और रवायात को अपने सीना से लगाए हुए हैं।

58 बरसों ने भी मग़रिबी तहज़ीब की चकाचौंध उन की नज़रों को ख़ीरा ना कर सकी और हैदराबादी मिज़ाज की सादगी आज भी उन की शख़्सियत से झलकती है। आम तौर पर देखा जाता है कि लोग चंद बरस तक मग़रिब में क़ियाम के बाद ख़ुद को मग़रिबी तहज़ीब से हम आहंग कर लेते हैं हत्ता कि हैदराबाद और उस की रवायात से अपनी वाबस्तगी का इज़हार करना कसरे शान समझने लगते हैं।

लेकिन प्रिंस मुहसिन अली ख़ांन आज भी दयारे ग़ैर में रह कर भी अहले हैदराबाद और उन के मसाइल के बारे में फ़िक्रमंद हैं। 1955 में लंदन मुंतक़िल होने वाले प्रिंस मुहसिन अली ख़ांन का ताल्लुक़ आसिफ़ जाह अव्वल के सिलसिले से है, और उन के वालिद नवाब मीर अब्दुल हमीद ख़ान मरहूम आसिफ़ जाह सलातीन के पास अहम ख़िदमात पर मामूर रह चुके हैं। नवाब मीर मुहसिन अली ख़ांन मुख़्तसर क़ियाम के लिए इन दिनों हैदराबाद में हैं।

उन्हों ने दफ़्तर सियासत पहुंच कर जनाब ज़ाहिद अली ख़ांन से मुलाक़ात की और वर्ल्ड पीस ऐंड प्रासपेरिटी फ़ाउंडेशन के सालाना एवार्ड बराए 2013 की कमेटी का दावतनामा हवाला किया। जिस में जनाब ज़ाहिद अली ख़ांन को 2013 के एवार्ड के लिए मुंतख़ब किया गया। मुख़्तलिफ़ शोबों में नुमायां ख़िदमात पर फ़ाउंडेशन की जानिब से ये एवार्ड्स पेश किए जाते हैं। 21 नवंबर को एवार्ड तक़रीब मुनाक़िद होगी। गुज़िश्ता दो बरसों से प्रिंस मुहसिन अली ख़ांन की सदारत में ये फ़ाउंडेशन अपनी ख़िदमात अंजाम दे रही है।

सियासत से एक मुलाक़ात में प्रिंस मुहसिन अली ख़ांन ने वर्ल्ड पीस ऐंड प्रासपेरिटी फ़ाउंडेशन के अग़राज़ और मक़ासिद पर रौशनी डाली। उन्हों ने बताया कि ये एक ग़ैर मुनफ़अत बख़्श तंज़ीम है जिस का मक़सद मुख़्तलिफ़ मज़ाहिब और ममालिक के दरमयान अमन और बेहतर ताल मेल को यक़ीनी बनाना है। साथ ही साथ सयासी, मआशी और तहज़ीबी शोबों में बाहमी तआवुन और सरगर्मीयों का फ़रोग़ भी फ़ाउंडेशन के मक़ासिद में शामिल है।

फ़ाउंडेशन चाहती है कि इन सरगर्मीयों के ज़रीए समाज के महरूम तबक़ात के म्यारे ज़िंदगी को बेहतर बनाया जाए और उन्हें ग़िज़ा, पानी, बर्क़ी, सेहत और सफ़ाई जैसे हुक़ूक़ से हमकिनार किया जाए। बर्तानिया की एक अहम अंजुमन English Speaking Union” जिस की सरपरस्त क्वीन एलिज़ाबेथ हैं। इस से भी प्रिंस मुहसिन अली ख़ान वाबस्ता हैं।

उन्हों ने अपनी मसरुफ़ियात के सिलसिले में यूरोप के मुख़्तलिफ़ ममालिक के इलावा दुनिया के और ममालिक का दौरा किया। बैन मज़ाहिब ताल मेल में इज़ाफ़ा, इख़्तिलाफ़ात और ग़लत फ़हमियों के ख़ात्मा के सिलसिले में उन की ख़िदमात को लंदन में तमाम तबक़ात क़दर की निगाह से देखते हैं। यूनीसेफ के मुख़्तलिफ़ प्रोग्रामों से प्रिंस वाबस्ता रहे हैं।

इस के इलावा फ़ेडरेशन ऑफ़ वर्ल्ड पीस से उनकी वाबस्तगी को नजरअंदाज़ नहीं किया जा सकता। प्रिंस मुहसिन अली ख़ान जो अपनी ज़ात में एक अंजुमन हैं वो अपनी आबाई विरासत और अवामी ख़िदमात के जज़्बा के तहत किसी शोहरत और हंगामा के बगै़र अपनी ख़िदमात का सिलसिला जारी रखे हैं। उन्हें अपने हैदराबादी होने और ख़ानदान आसिफ़िया से ताल्लुक़ पर फ़ख़र है।

वो चाहते हैं कि अपनी आख़िरी सांस तक अवामी ख़िदमात का यही सिलसिला जारी रहे। बर्तानिया में हिंदुस्तानी और एशियाई बिरादरी में उन्हें हैदराबाद के तहज़ीबी सफ़ीर की हैसियत से जाना जाता है। प्रिंस मुहसिन अली ख़ांन की ज़िंदगी और उन की ख़िदमात पर ये मिसरा सादिक़ आता है:
काम छोड़ा है, कहीं नाम नहीं छोड़ा है

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