Wednesday , September 26 2018

सऊदी अरब को हथियार बेचने के खिलाफ़ हैं फ्रांस के ज्यादातर लोग- रिपोर्ट

फ्रांस के तीन चौथाई लोग सऊदी अरब को हथियार बेचे जाने के खिलाफ है। सऊदी क्राउन प्रिंस के फ्रांस दौरे से पहले एक सर्वे में यह बात सामने आई है।

यमन में जारी गृहयुद्ध में सऊदी अरब के हस्तक्षेप को तीन साल पूरे होने पर एक स्वतंत्र रिसर्च ग्रुप यूगोव ने यह सर्वे किया है। एमनेस्टी इंटरनेशनल समेत कई गैर सरकारी संगठन फ्रांस के राष्ट्रपति इमानुएल माक्रों पर इस बात के लिए दबाव बना रहे हैं कि वे सऊदी अरब के साथ हथियारों की बिक्री की डील ना करें। अगले महीने सऊदी क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान पेरिस के दौरे पर आ रहे हैं।

नॉर्वे पहले ही संयुक्त अरब अमीरात को हथियारों का निर्यात रोक चुका है। यूएई यमन में सऊदी अरब के नेतृत्व में हवाई हमले कर रहे सऊदी गठबंधन का हिस्सा है। जर्मनी की नई सरकार ने भी कहा है कि यमन संकट में शामिल देशों को हथियार नहीं निर्यात नहीं किए जाएंगे।

अब फ्रांस में हुए सर्वे में लगभग 74 प्रतिशत लोगों ने सऊदी अरब को हथियार बेचने पर सवाल उठाया है। सर्वे में शामिल 71 प्रतिशत लोग यूएई को भी हथियारों की आपूर्ति के खिलाफ हैं. फ्रांस में हुए ऑनलाइन यूगोव के इस सर्वे 18 साल से ज्यादा उम्र के 1026 लोगों का सैंपल लिया गया था।

फ्रांस दुनिया में सबसे ज्यादा हथियार निर्यात करने वाले देशों में शामिल है, जो सऊदी अरब और यूएई को लगातार हथियार बेच रहा है। मानवाधिकार संस्थाओं का कहना है कि फ्रांस इस बात को पूरी तरह सुनिश्चित नहीं कर रहा है कि उसके बेचे हथियार यमन में इस्तेमाल नहीं होंगे। फ्रांस से निर्यात होने वाले हथियारों में सीजर आर्टलरी गन और गोला बारूद, स्नाइपर राइफलें और बख्तरबंद गाड़ियां शामिल हैं।

दूसरी तरफ, फ्रांस के प्रधानमंत्री एडुआर्ड फिलिपे के कार्यालय का कहना है कि सऊदी अरब को बेचे गए हथियार सिर्फ रक्षा के लिए हैं और उनका इस्तेमाल सिर्फ विद्रोहियों के हमलों को रोकने के लिए किया जा रहा है। हाल के दिनों यमन के हूथी बागियों ने कई बार सऊदी अरब की तरफ मिसाइलें दागी हैं।

मार्च 2015 में सऊदी अरब के नेतृत्व में मध्य पूर्व और अफ्रीका के नौ देशों ने यमन में जारी गृहयुद्ध में हस्तक्षेप किया। यह गठबंधन हूथी बागियों के खिलाफ यमन के सरकारी बलों का समर्थन कर रहा है। वहीं माना जाता है कि यमन की राजधानी सना पर नियंत्रण करने वाले हूथी बागियों को ईरान का समर्थन है।

मार्च 2015 से यमन के संकट में अब तक 10 हजार से ज्यादा आम लोग मारे गए हैं जबकि 53 हजार से ज्यादा बेघर हो गए हैं। संयुक्त राष्ट्र यमन के संकट को “दुनिया सबसे बुरा मानवीय संकट” बताता है।

साभार- dw

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