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8 आतंकियों का एक साथ भागना, फिर कुछ घंटो बाद एक ही साथ एनकाउंटर में मारे जाना । सरकार के पास व्यापम फार्मूला भी था।

मध्य प्रदेश की भोपाल सेंट्रल जेल में जेलकर्मी को मारकर फरार हुए सिमी के आठों संदिग्धों के इनकाउंटर पर कई सवाल खड़े किये जा रहे है। एक तरफ मध्य प्रदेश कांग्रेस के प्रवक्ता मुकेश नायक इस इंकाउटर को सुनियोजित साजिश बता रहे हैं। मध्य प्रदेश सरकार की एक प्री प्लान एक्टीविटी करार दिया है। वहीं दिग्विजय सिंह भी इस पर संदेह जताया है।
वहीं आम आदमी पार्टी की विधायक अल्का लांबा सोमवार को एक ट्वीट को रीट्वीट किया जिसमें लिखा था “आतंकी मारे गए अच्छा हुआ। 8 आतंकियों का एक साथ भागना, फिर कुछ घंटो बाद एक ही साथ एनकाउंटर में मारे जाना । सरकार के पास व्यापम फार्मूला भी था।”

भोपाल के आईजी योगेश चौधरी ने कई ऐसे सवाल के जवाब नहीं दिये जहां से इस इंकाउटर पर शक पैदा होता है।

भोपाल पुलिस ने इन सभी संदिग्धों को जवाबी फायरिंग में मारे जाने का दावा किया है। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि आखिर इन संदिग्धों के मददगार कौन थे।
जेल से भागते वक्त उनके पास हथियार कैसे हासिल किये।

पुलिस के दावों पर यकीन किया जाये तो इनके पास हथियार, स्पोर्टस् शूज और हाईटेक जीपीएस वॉच भी पहनी हुई थी। उनके पास खाने पीने का समान भी पाया गया लेकिन रात के तीन बजे अचानक भागे जाने के उनकों ये सारी चीजे कैसे मिल जाती है।
भोपाल पुलिस के आईजी से जब यह पूछा गया कि आतंकी किन- किन हथियारों से लैस थे, इसका भी जवाब आईजी योगेश चौधरी ने सीधे नहीं दिया।

बता दे कि  पुलिस के दावे के मुताबिक सोमवार तड़के सिमी के आठ संदिग्धों भोपाल सेंट्रल जेल में एक सुरक्षाकर्मी की हत्या करके फरार हो गए थे।  इसके बाद भोपाल समेत पूरे राज्य में हाई अलर्ट घोषित कर दिया गया था। मामले पर गृह मंत्रालय ने राज्य सरकार से रिपोर्ट भी मांगी थी। वहीं, चार जेल अफसरों को सस्पेंड भी कर दिया गया था।

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