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करिश्माई है आब-ए-जमजम, तारिक हुसैन की रिसर्च 

हम आपको रूबरू करवा रहे हैं उस इंजीनियर शख्स से जिसने करीब चालीस साल पहले खुद आब ए जमजम का निरीक्षण किया था। जमजम पानी का सैंपल यूरोपियन लेबोरेट्री में भेजा गया । जांच में जो बातें आई उससे साबित हुआ कि जमजम पानी इंसान के लिए रब की बेहतरीन नियामत है। आम पानी से अलग इसमें इंसानों के लिए बड़े-बड़े फायदे छिपे हैं। 

मै आपको देता हूं उनके तरफ से किए गए इसके रिसर्च से जुड़ी जानकारी। 1971 की बात है। मिस्र के एक डॉक्टर ने यूरोपियन प्रेस को लिखा कि मक्का का जमजम पानी लोगों के पीने के क़ाबिल नहीं है। वो फ़ौरन समझा गया था कि मिस्र के इस डॉक्टर का प्रेस को दिया यह बयान मुसलमानों के खिलाफ साजिश है। दरअसल इसके इस बयान की बुनियाद था कि काबा सी लेबल से नीचे है और यह मक्का शहर के बीचोंबीच वाक़ेय है। इस वजह से मक्का शहर का गंदा पानी नालों से इस कुएं में आकर जमा होता रहता है।

यह खबर सऊदी हुकूमत किंग फैसल तक पहुंची। उनको यह बहुत ज्यादा अखरी और उन्होंने मिस्र के इस डॉक्टर के इस प्रोपेगण्डे को गलत साबित करने का फैसला किया। उन्होंने फौरन सऊदिया के कृषि और पानी वसायल वुज़रा को इस मामले की जांच करने और जमजम पानी का एक सैंपल चैक करने के लिए यूरोपियन लेबोरेट्री में भी भेजे जाने का हुक़्म दिया। वुज़रा ने जेद्दा वाक़ेय पावर डिजॉलेशन प्लांट्स को यह जिम्मेदारी सौंपी। तब वो इंजीनियर यहां केमिकल इंजीनियर के तौर में काम कर रहे  थे और उनका काम समंदर के पानी को पीने काबिल बनाना था। उन्हें जमजम पानी को चैक करने की जिम्मेदारी सौपी गई। उन्हें याद है उस वक्त उन्हें जमजम के बारे में कोई अंदाजा नहीं था। ना यह कि इस कुएं में किस तरह का पानी है। वो मक्का पहुंचा और उन्होंने काबा के अफसरों को वहां आने का अपना मकसद बताया। उन्होंने उनकी मदद के लिए एक आदमी को लगा दिया। जब वो वहां पहुंचे तो उन्होंने देखा यह तो पानी का एक छोटा कुण्ड सा था। छोटे पोखर के समान। 18 बाई 14 का यह कुआं हर साल लाखों गैलन पानी हाजियों को देता है। और यह सिलसिला तब से ही चालू है जब से यह वजूद में आया। यानी कई शताब्दियों पहले हजरत इब्राहीम के वक्त से ही।

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उन्होंने अपनी खोजबीन शुरू की और कुएं के विस्तार को समझने की कोशिश की। अपने साथ वाले बंदे को कुएं की गहराई मापने को कहा। वह शावर ले गया और पानी में उतरा। वह पानी में सीधा खड़ा हो गया। उन्होंने देखा पानी का सतह उसके कंधों से थोड़ा ही ऊपर था। उस शख्स की ऊंचाई तक़रीबन  पांच फीट आठ इंच थी। उस शख्स ने सीधा खड़ा रहते हुए उस कुएं में एक कोने से दूसरे कोने की तरफ खोजबीन की कि आखिर इसमें पानी किस तरफ से आ रहा है। पानी की धारा कहां है जहां से पानी निकल रहा है। (उसे पानी में डूबकी लगाने की इजाजत नहीं थी।) उसने बताया कि वह नहीं खोज पाया कि पानी किस जगह से निकलता है।

पानी आने की जगह ना मिलने पर उसने दूसरा आइडिया सोचा। उन्होंने उस कुएं से पानी निकालने के लिए बड़े पंप लगा दिए ताकि वहां से तेजी से पानी निकल सके और पानी के स्रोत का पता लग सके। उन्हें हैरत हुई कि ऐसा करने पर भी उन्हें इस कुएं में पानी आने की जगह का पता नहीं चल पाया। लेकिन उनके पास सिर्फ यही एकमात्र तरीका था जिससे यह जाना जा सकता था कि आखिर इस पानी का प्रवेश किधर से है। इसलिए उन्होंने पंप से पानी निकालने के तरीके को फिर से दोहराया और उसने उस शख्स को हिदायत दिया कि वह पानी में खड़े रहकर गौर से उस जगह को पहचानने की कोशिश करे। अच्छी तरह ध्यान दें कि कौनसी जगह हलचल सी दिखाई दे रही है। इस बार कुछ समय बाद ही उसने हाथ उठाया और खुशी से झूम उठा और बोल पड़ा-अलहम्दु लिल्लाह मुझे कुएं में पानी आने की जगह का पता चल गया। उनके पैरों के नीचे ही यह जगह है जहां से पानी निकल रहा है। पंप से पानी निकालने के दौरान ही उसने कुएं के चारों तरफ चक्कर लगाए और उसने देखा कि ऐसा ही कुएं में दूसरी जगह भी हो रहा है। यानी कुएं में हर हिस्से से पानी के निकलने का क्रम जारी है। दरअसल कुएं में पानी की आवक हर पॉइंट से समान रूप से थी और इसी वजह से जमजम के कुएं के पानी का सतह लगातार एक सा रहता है। और इस तरह उन्हीने अपना काम पूरा किया और यूरोपियन लेबोरेट्री में जांच के लिए भेजने के लिए पानी का सैंपल ले आया।

जमजम पानी में कैल्शियम और मैग्नेशियम
जमजम के पानी और मक्का शहर के दीगर पानी में केल्शियम और मैग्रेशियम साल्ट्स की मात्रा का फर्क था। जमजम में ये दोनों तत्व ज्यादा थे। शायद यही वजह थी कि जमजम का पानी यहां आने वाले कमजोर हाजी को भी उर्जस्वित और तरोताजा बनाए रखता है। 

जमजम पानी में फ्लोराइड
अहम  बात यह थी कि जमजम के पानी में पाया जाने वाला फ्लोराइड अपना अहम असर रखता है। यह फ्लोराइड कीटाणुनाशक होता है। सबसे अहम बात यह है कि यूरोपियन लेबोरेट्री ने अपनी जांच के बाद बताया कि यह पानी पीने के लिए एकदम उपयुक्त है। और इस तरह मिस्र के डॉक्टर का जमजम के बारे में फैलाया गया प्रोपेगण्डा गलत साबित हुआ। इस रिपोर्ट की जानकारी जब शाह फैसल को दी गई तो वे बेहद खुश हुए और उन्होंने यूरोपियन प्रेस को यह जांच रिपोर्ट भिजवाने के हुक़्म दिए। सच्चाई यह है कि आप जितना ज़्यादा इस पानी को जांचते हैं उतनी नई और अहम बातें सामने आती हैं और आपके ईमान में इज़ाफ़ा होती जाती है।

कभी नहीं सूखा- जमजम का यह कुआं कभी भी नहीं सूखा। यही नहीं इस कुएं ने जरूरत के मुताबिक पानी की सप्लाय की है। जब-जब जितने पानी की जरूरत हुई, यहां पानी दस्तयाब हुआ।

एक सी साल्ट संरचना- इस पानी के साल्ट की बनावट हमेशा एक जैसी रही है। इसका स्वाद भी जबसे यह वजूद में आया तब से एक सा ही है।
सभी के लिए फायदेमंद- यह पानी सभी को सूट करने वाला और फायदेमंद साबित हुआ है। इसने अपनी दुनिया ने अहमियत को साबित किया है। दुनियाभर से हज और उमरा के लिए मक्का आने वाले लोग इसको पीते हैं और इनको इस पानी को लेकर कोई शिकायत नहीं रही। बल्कि ये इस पानी को बड़े चाव से पीते हैं और खुद को तरोताजा महसूस करते हैं।

यूनिवर्सल टेस्ट- अक्सर देखा गया है कि अलग-अलग जगह के पानी का स्वाद अलग-अलग होता है लेकिन जमजम पानी का स्वाद यूनिवर्सल है। हर पीने वाले को इस पानी का स्वाद अलग सा महसूस नहीं होता है।

कोई जैविक विकास नहीं- इस पानी को कभी रसायन डालकर साफ़ करने की जरूरत नहीं होती जैसा कि दीगर पिने के पानी के मामले में यह तरीका अपनाया जाता है। यह भी देखा गया है कि आमतौर पर कुओं में कई जीव और वनस्पति पनप जाते हैं। कुओं में शैवाल हो जाते हैं जिससे कुएं के पानी में स्वाद और गंध की मसला पैदा हो जाती है। लेकिन जमजम के कुए में किसी तरह का जैविक विकास का कोई निशाँ भी नहीं मिला।

शताब्दियों पहले बीबी हाजरा अलै. अपने नवजात बच्चे इस्माइल अलै. की प्यास बुझाने के लिए पानी की तलाश के लिए सफा और मरवा पहाडिय़ों के बीच दौड़ लगाती है। इसी दौरान मासूम इस्माइल अलै. अपनी एडिय़ों को रेत पर रगड़ते हैं। अल्लाह के करम से उस जगह पानी निकलने लगता है। फिर यह जगह कुएं का रूप ले लेती है जो जाना जाता है जमजम का पानी।

रिसर्च- तारिक हुसैन,रियाद 

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