9 दिसंबर को होना है कन्नूर हवाईअड्डे का उद्घाटन, पहले ही उतरा अमित शाह का विमान, बढ़ा विवाद

9 दिसंबर को होना है कन्नूर हवाईअड्डे का उद्घाटन, पहले ही उतरा अमित शाह का विमान, बढ़ा विवाद
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नई दिल्ली: बिना औपचारिक उद्घाटन के ही कन्नूर हवाईअड्डे पर बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह के विमान के उतरने से विवाद खड़ा हो गया है. केरल के एक मंत्री ने रविवार को उनके उस बयान की आलोचना की जिसमें उन्होंने एलडीएफ सरकार को उखाड़ फेंकने की धमकी दी थी. उन्होंने कहा कि उन्हें राज्य की आतिथ्य की परंपरा के तहत वहां उतरने की मंजूरी दी गई. राज्य के वित्त मंत्री टी एम थॉमस आइजक ने ट्वीट किया कि प्रदेश सरकार ने अतिथ्य की परंपरा का निर्वाह करते हुए शाह को हवाईअड्डे पर उतरने की मंजूरी दी, जिसका औपचारिक उद्घाटन भी अभी नहीं हुआ है, और भाजपा नेता ने केरल की वामपंथी सरकार को सत्ता से बाहर करने की धमकी दी.

कन्नूर हवाईअड्डे का औपचारिक उद्घाटन 9 दिसंबर को होना है. यह राज्य का चौथा हवाईअड्डा होगा. बीजेपी के नये जिला समिति कार्यालय का उद्घाटन करने के लिए विशेष विमान से यहां पहुंचे शाह कन्नूर के मत्तनूर में हवाईअड्डे पर अनाधिकारिक रूप से उतरने वाले पहले यात्री बने. इसाक ने कहा कि शाह की ‘खोखली धमकियां’ हताशा की वजह से थीं क्योंकि भाजपा को अभी विधानसभा में और सदस्य चाहिए. पूर्व केंद्रीय मंत्री ओ राजगोपाल सदन में भाजपा के एक मात्र विधायक हैं.

वहीं मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस ने भाजपा अध्यक्ष को उद्घाटन के बगैर ही हवाई अड्डे का इस्तेमाल करने की इजाजत देने पर एलडीएफ सरकार की आलोचना की. केरल प्रदेश कांग्रेस समिति (केपीसीसी) अध्यक्ष मुल्लाप्पल्ली रामाचंद्रन ने आरोप लगाया कि भाजपा अध्यक्ष और मुख्यमंत्री पिनराई विजयन के बीच ‘समझौते’ के बाद शाह को हवाईअड्डे पर उतरने की इजाजत दी गई.

अमित शाह ने शनिवार को केरल दौरे के दौरान कहा कि राज्य में आपातकाल जैसे हालात हैं. राज्य सरकार सबरीमला मामले में प्रदर्शन कर रहे अयप्पा श्रद्धालुओं के खिलाफ बर्बरतापूर्वक बल का प्रयोग कर आग से खेल रही है. राजनीतिक रूप से संवेदनशील कन्नूर में भाजपा के जिला कार्यालय का उद्घाटन करने के बाद अपने भाषण में बेहद कड़े शब्दों का प्रयोग करते हुए शाह ने आरोप लगाया कि वामपंथी सरकार मंदिरों के खिलाफ षड्यंत्र कर रही है. वामपंथी सरकार पर जम कर बरसते हुए शाह ने माहवारी आयुवर्ग की महिलाओं को अयप्पा मंदिर में प्रवेश देने के उच्चतम न्यायालय के फैसले का विरोध कर रहे श्रद्धालुओं का समर्थन किया था.

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