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9 साल से पाकिस्तानी जेल में बंद है धनबाद का नरेश

धनबाद : 45 दिनों से धनबाद के विशनपुर का राणा खानदान खुशी और गम के दरमियान की बेचैनी से जूझ रहा है। खुशी है, उस बेटे के जिंदा रहने की, जिसे उन्होंने 9 साल पहले मारे हुआ मान लिया था। गम इस बात का कि बेटा पाकिस्तान की जेल में बंद है। बेचैनी है बेटा लौटेगा कब? क्या पाकिस्तान उसे छोड़ेगा? वाकया है साल 2006 का। 17 साला नरेश राणा रोजी-रोटी की तलाश में सूरत गया था। वहां उसे समुद्र में मछली पकड़ने की नौकरी मिली थी। मछली पकड़ने के दौरान वह एक दिन समुद्री सरहद लांघ गया। पाकिस्तानी नौसेना ने उसे पकड़ लिया। जेल में बंद कर दिया।

कई दिन तक कोई खबर नहीं मिली तो नरेश के भाई बाजो राणा ने गुजरात से लेकर जमुई वाके अबाई घर तक खोज की। लेकिन कुछ पता नहीं चला। फिर एक दिन खबर मिली कि जिस दिन नरेश समुद्र में गया था, उस दिन तूफान आया था। कई मछुआरे लापता थे। अहले खाना ने नरेश को मारा हुआ मान लिया। उसका आखरी अमल भी कर दिया। इस साल एक अक्टूबर को वक़्त ने करवट ली। अखबार में शाया एक इश्तिहार ने इस खानदान की खुशियां लौटा दीं। इश्तिहार में कुछ मछुआरों के पाकिस्तान की जेल में बंद होने की जानकारी तस्वीर के साथ दी गई थी। इसमें नरेश की फोटो भी थी। भाई ने तस्वीर पहचान ली।

इश्तिहार देखने के बाद नरेश के अहले खाना ने लोहरदगा पुलिस के बाइरून मुल्क शाख से राब्ता किया। जमुई में एसपी को भी इसकी जानकारी दी गई है। इस सिलसिले में वजीरे आजम, वजीरे खारजा और दाखिला वज़ीर को भी खत लिखा है। लेकिन अभी तक उसका जवाब नहीं आया है।
भाई ने आखिरी बार फोन पर कहा था- मैं सूरत में हूं बाजो राणा ने बताया कि नरेश उर्फ रमेश ने 2006 में ही एक बार फोन किया था। वह नौकरी मिलने पर खुश था। उसके आखिरी अलफाज यही थे कि मैं सूरत में हूं। हमदाेनों के दरमियान वह आखिरी बातचीत थी। उसके बाद कभी भी नरेश से राब्ता नहीं हो पाया।

 

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