असम में नागरिकता संशोधन बिल के खिलाफ सड़कों पर उतरे लोग, हो रहा विरोध-प्रदर्शन

असम में नागरिकता संशोधन बिल के खिलाफ सड़कों पर उतरे लोग, हो रहा विरोध-प्रदर्शन
Activists of All Assam Students Union (AASU) take part in a torch light procession to protest against the government's Citizenship Amendment Bill, in Guwahati on December 8, 2019. (Photo by David TALUKDAR / AFP)

नागरिकता संशोधन बिल सोमवार को संसद में पेश होगा. इस बीच देश के कई इलाकों में इस बिल का विरोध जारी है. असम की बात करें तो गुवाहाटी विरोध-प्रदर्शन का केंद्र बना हुआ है. रविवार को ऑल असम स्टूडेंट यूनियन ने मशाल जुलूस निकाला.

असम में पिछले एक हफ्ते से नागरिकता संशोधन विधेयक के विरोध में रैलियों और प्रदर्शन का सिलसिला जारी है। असम में भाजपा नीत सरकार के मंत्रियों को काले झंडे दिखाए जा रहे हैं और उनके पुतले जलाए जा रहे हैं। सोमवार को संसद में गृहमंत्री अमित शाह नागरिक एकता सांशोधन बिल को पेश करेंगे।

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भाजपा सरकार सोमवार को लोकसभा में संशोधन विधेयक पेश करने जा रही है। इस संशोधन के जरिए 31 दिसंबर 2014 तक जो हिंदू, सिख, ईसाई, जैन, बौद्ध और पारसी बांग्लादेश, पाकिस्तान और अफगानिस्तान से भारत में आ चुके हैं, उन्हें नागरिकता प्रदान करने की राह खुल जाएगी। राज्य के छात्र संगठन, सामाजिक संगठन और विपक्षी पार्टियां इस विधेयक के विरोध में प्रदर्शन कर रही हैं, उनका कहना है इस विधेयक से बांग्लादेश से आने वाले धार्मिक अल्पसंख्यकों की घुसपैठ बढ़ जाएगी जिससे अन्य समुदायों के हितों को नुकसान होगा।

पूर्वोत्तर के 7 राज्यों के छात्र संगठनों को मिलाकर बनी नॉर्थ ईस्ट स्टूडेंट्स ऑर्गेनाइजेशन ने मंगलवार को सुबह 5:00 बजे से 11 घंटे के बंद का आह्वान किया है। ऑल असम स्टूडेंट यूनियन जोकि राज्य की छात्रों की सबसे बड़ी इकाई है उसने विधेयक के विरोध में प्रदर्शनों की एक लंबे कार्यक्रम की घोषणा की है।

असम घुसपैठियों के लिए कोई डस्टबिन नहीं है

आल असम स्टूडेंट्स यूनियन आसू के मुख्य सलाहकार समुज्जल भट्टाचार्य ने शनिवार को कहा कि असम घुसपैठियों के लिए कोई डस्टबिन नहीं है, भाजपा संसद में अपनी संख्या के दम पर इस विधेयक को पारित कराना चाहती है, जिसे हम स्वीकार नहीं करेंगे और विरोध जारी रखेंगे। राज्य में कांग्रेस और ऑल इंडिया यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट दो मुख्य विपक्षी दल नागरिकता विधेयक का विरोध कर रहे हैं और इसे 1985 के असम समझौते के खिलाफ बता रहे हैं।

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