Wednesday , April 25 2018

क्या मोदी सरकार के दिल में बच्चों के लिए चिंता है?- अभिसार शर्मा

मगर क्या प्रकाश जावड़ेकरजी इस संवेदनहीनता को किसी भी सूरत मे जायज़ ठहरा सकते हैं ? बच्चों के आंसू मायने रखते हैे आपके लिए. अगर बंगाल के दंगे मायने रखते हैं तो फिर बिहार पर खामोशी क्यों ? और बिहार मे तो हद ही हो गई है ना?

एक ऐसे दिन जब सीबीएससी का पेपर लीक हो गया हो …जब गणित और अर्थशास्त्र का पेपर Whats APP पर आ गया हो , देश के शिक्षा मंत्री प्रकाश जावड़ेकर बंगाल मे साम्प्रदायिक हिंसा पर प्रेस कांफ्रेस करते हैं. बच्चे रो रहे हैं..उनकी मेहनत और प्लानिंग बर्बाद हो गई, मगर ये नाकारा सरकार हमे अब लोगों को बांटने वाली सियासत के रास्ते पर चलाना चाहती है. गज़ब की प्राथमिकता है इस सरकार की. बच्चों के आंसू भी इनके लिए मायने नहीं रखते.

यही हुआ था उस दिन जब एलओसी पर गोलाबारी मे 3 मासूम बच्चे मारे गए थे … उस दिन भी रक्षा मंत्री आई थीं, मगर प्राथमिकता थी राहुल गांधी पर हमला. देश को सूचना प्रसारण मंत्री भी मिला है. मैडम भी अपनी सारी ऊर्जा राहुल गांधी पर केंन्द्रित रखती हैं.

मगर क्या प्रकाश जावड़ेकरजी इस संवेदनहीनता को किसी भी सूरत मे जायज़ ठहरा सकते हैं ? बच्चों के आंसू मायने रखते हैे आपके लिए. अगर बंगाल के दंगे मायने रखते हैं तो फिर बिहार पर खामोशी क्यों ? और बिहार मे तो हद ही हो गई है ना? वहां पर अब चार चार जिलों मे दंगे भड़क उठे हैं ? ऐसे पहले तो कभी नही हुआ. बिहार तो दंगों सो अछूता था ना . वहां पर तो आपके मंत्री खुले आम अपनी ही सरकार यानि नीतीश सरकार की बखिया उधेड़ रहे हैं. भागलपुर से दंगे शूरू हुए, इसकी वजह तो मंत्री अश्विनी चौबे के होनहार बेटे अर्जित थे, जिन्होने नियम कानून की धज्जियां उड़ाते हुए यात्रा कर डाली और नतीजा आपके सामने है.

इसी तरह बंगाल मे भी जहां ममता बैनरजी सरकार की नाकामी है , ये भी तो देखिए कि आपके मंत्री कैसे कैसे बयान दे रहे हैं ?

ये हर तरफ दंगें जैसे माहौल आपको बेशक सियासी फायदा पहुंचा दें , मगर आप एक आम भारतीय परिवार के लिए कैसा माहौल कायम कर रहे हैं. बताईये ? और उसी परिवार मे बच्चे भी हैं. क्या उनकी चिंता है आपको? क्या देश मे अगर नियमित रूप से दंगे होते रहे, तो पेपर लीक तो दूर की बात, पेपर ही नहीं हो पाएंगे. क्या इसलिए शिक्षा मंत्री होते हुए भी , आप जब देश के सामने आते हैं तो दंगों पर आपना आंशिक दर्द बयान करते हैं …ये नहीं बताते कि बिहार मे आपकी पार्टी के नेता खुलेआम भड़काऊ बयान दे रहे हैं?

क्या यही वजह है कि आप इस कदर उदासीन और बेपरवाह हो गए हैं कि सीबीएससी पेपर लीक आपके लिए दोयम दर्जे की बात हो जाती है?

मेरे बच्चे मेरा मज़हब हैं, मेरा जुनून हैं. लिहाज़ा मै उनके बारे मे बहुत इमोशनल हूं. यही वजह है कि जब मैं ऐसी सरकार देखता हूं जिसके लिए मेरे बच्चे उसकी प्राथमिकता मे दूसरे नम्बर पर हैं , तो मुझे हैरत ही नहीं गुस्सा भी आता है. बोर्ड की परीक्षा आसान बात नहीं जावड़ेकर साहब. आप भी जानते हैं.

कम से कम दो जगहों से खबर मिली है, मेरे जानकार हैं. पेपर लीक होने की वजह से उनके बच्चों का रो रो कर बुरा हाल है. सारी की सारी प्लानिंग चौपट हो गई है. भविष्य की रूपरेखा बिगड़ गई है इन बच्चों की. कम से कम आज देश के सामने आकर आपको सबसे पहले और सबसे पहले ही नहीं, सिर्फ इसी मुद्दे पर उन बच्चों का हौसला बढाना चाहिए था ….मगर अफसोस .इसीलिए कहना पड़ रहा है. अबकी बार बेदिल सरकार.

(यह लेखक वरिष्ठ टीवी पत्रकार अभिसार शर्मा के अपने विचार हैं, उनके फेसबुक पेज से लिया गया लेख है)

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