अभिसार शर्मा का ब्लॉग- ‘राम का नाम बदनाम न करो’

अभिसार शर्मा का ब्लॉग- ‘राम का नाम बदनाम न करो’

वरिष्ठ पत्रकार अभिसार शर्मा का नया और दिल को झकझोर देने वाला ब्लॉग वायरल हो रहा है। उन्होंने अपने फेसबुक पेज पर लिखा है- ये विडियो मैंने कुछ दिन पहले देखा और तुरंत इसे ऑफिस को भेज दिया। ये पहला विडियो नहीं है, कम से कम तीन विडियो देख चुका हूं जब बुज़ुर्ग मुसलमान को ऐसे बे इज़्ज़त करके पीटा गया है। ये लोग जो बेबस लोगों को पीटते हैं, मेरे राम का अपमान करते हैं। ये मेरे राम की तौहीन करते हैं। इन लोगों का ना राम से ना उनके व्यक्तित्व से कोई लेना देना है। ये लोग ना सिर्फ राम बल्कि पूरे देश को रुसवा कर रहे हैं।

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ऐसे ही विडियो पाकिस्तानी दिखा दिखा कर कहते हैं के जिन्ना की two nation theory सही थी। ये लोग सबसे बड़े देश द्रोही हैं क्योंकि ऐसे विडियो देखने के बाद कोई भी MAKE IN INDIA के लिए भारत नहीं आएगा। लोग भारत आने से डरेंगे, क्योंकि अब गुंडा मुख्यधारा का हिस्सा बनाया जा रहा है। हम सब जानते हैं के ये असली इंडिया नहीं है… मगर अफसोस के असली इंडिया और इंडिया के लोग खामोश हैं।

सरकार द्वारा पोषित गुंडों की दादागिरी को चुप चाप देख रहे हैं। ये लोग सोचते हैं के “मेरा क्या, मुझे क्या”. और आग अभी मेरे दामन तक नहीं पहुंची है, और सत्ता का ये आलम है के वो इस सब को बढ़ावा दे रही है क्योंकि ये उनके सियासी खेल को मज़बूती देता है। मगर किसी को परवाह नहीं के हम भविष्य मे अपने बच्चों के लिए क्या विरासत छोड़ कर जा रहे हैं..

भक्तों की गालियाँ और तमाम दबाव के बावजूद मैं क्यों ऐसे मुद्दों पर बोलता हूं? क्योंकि मुझे अपने बच्चों की परवाह है। उनकी सोच की चिंता है, ये पत्रकार जो दंगा भड़काने वाली बहस करते हैं, क्या वो यही कचरा अपने बच्चों के साथ भी बोलते हैं? क्या वो यही घृणा अपने बच्चों को भी सिखाते हैं? ये कैसे मा बाप हैं जो अपने बच्चों को नफरत करना सिखा रहे हैं? कम से कम उनके बारे मे तो सोचिए? चलिए मान लिया के मेरी तरह आपका दिल इस बुज़ुर्ग मुसलमान के लिए नहीं रोता, तो कम से कम अपने बच्चों के बारे मे तो सोच लो?

और राम का नाम बदनाम तो मत करो? मेरे नाना पंडित गणेश प्रसाद शर्मा राम भक्त थे, राम की पूजा करते थे। मगर मैंने उनके मूह से कभी किसी अन्य धर्म के व्यक्ति के बारे मे बुरा नहीं सुना। कभी किसी दलित, किसी पिछड़ी जाति के व्यक्ति को उनके ज़रिए बेइज़्ज़त होते नहीं देखा, और यही परवरिश मुझे अपनी मा यानी उनकी बेटी से मिली है। मुझे भी गर्व है अपनी परवरिश पर और उम्मीद करता हूं, मेरे बच्चों को मेरी शिक्षा पर किसी दिन गर्व होगा।

मैं जानता हूं के कुछ लोग हैं जो इस बेबस बुज़ुर्ग के पिटने पर तालियां ठोक रहे होंगे। वो मेरा लिखा पढ़ने के बाद भी मुझे ही गाली देंगे। क्योंकि ये नहीं जानते के समाज खांचे मे नहीं बसता अलग अलग गड्ढों मे नहीं बसता। हम सब एक दूसरे से जुड़े हुए हैं… एक व्यक्ति, एक समुदाय पर ज़ुल्म से बाक़ी समाज नहीं ख़ुश रह सकता। कश्मीर को देख लो, पंडितों को बाहर करके कौनसा खुश हैं वहां के मुसलमान? मैं जानता हूं के वजह और भी हैं, मगर उन्हे बाहर करके बाक़ी लोग भी तो पिस रहे हैं? अगर वो रहते तो हालात सामान्य होते, उनके साथ नाइंसाफी ना हुई होती तो सब ख़ुश रहते!

मगर अब सब बांटा जा रहा है सब को तोड़ने का मानो प्रयास है। मैं इस सोच, इस अराजकता को जायज़ और उसे मुख्यधारा मे लाने के सुनियोजित प्रयास का विरोध करता हूं। अपने बच्चों के लिए।
मेरे नाना, गणेश प्रसाद शर्मा के “राम” के लिए
https://www.facebook.com/abplive/videos/2155778871106792/

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