Tuesday , July 17 2018

गुजरात सरकार के सभी मांगें मानने पर भानु भाई वनकर का मृत देह स्वीकार किया

अहमदाबाद /गांधीनगर। भानु भाई वनकर की दलित समाज के लिए दी गई शहादत के बाद गुजरात सरकार द्वारा किसी निर्णय पर न पहुँचने के कारण हाल दलित नेता तथा वडगाम विधायक जिग्नेश मेवानी अहमदाबाद बंद का कॉल दिया था।

इसके बाद पुलिस ने जिग्नेश समर्थकों को गिरफ्तार करना शुरू कर दिया सबसे पहले जिग्नेश मेवानी को अहमदाबाद के सरसपुर से डिटेन कर लिया मेवानी सारंगपुर जा रहे थे जहाँ पर राष्ट्रीय दलित अधिकार मंच के कार्यकर्ता एकत्रित होने वाले थे मेवानी को पहले क्राइम ब्रांच फिर एस ओ जी के ऑफिस ले गए जुहापुरा स्थित एसओजी ऑफिस में मेवानी को रखे जाने की खबर फैलते ही मुस्लिम समाज के लोग मेवानी की रिहाई की मांग के साथ धरने पर बैठ गए। धरने का नेतृत्व आवाज़ संस्था के कौशर अली सैय्यद ने किया।


सारंगपुर में एकत्र हुए दलित कार्यकर्ता सुबोध परमार के नेतृत्व में बंद करना शुरू किया ही था अहमदाबाद रेलवे स्टेशन के पास से ढाई सौ से अधिक दलितों और मुस्लिमों को पुलिस ने डिटेन कर शाही बाग पुलिस स्टेडियम ले गए। मेवानी तथा अन्य लोगों को डिटेन की खबर आई तो अहमदाबाद के अन्य विस्तारों से दलित सड़क पर आने लगे जगह जगह चक्का जाम कर टायर जलाया। रानिप में कार और कुछ अन्य वहां जलाये जाने की खबर आई दलितों ने अहमदाबाद के हाटकेश्वर ,अमराईवाड़ी, सोनी की चाल, वेजलपुर, राणिप,नरोड़ा ,नवा वाडज,आश्रम रोड , शाही बाग इत्यादि जगह उग्र प्रदर्शन हुआ।

सोनी की चाली पर दलित महिलाओं ने थाली बेलन से प्रदर्शन किया। जसोदा नगर और दधीची ब्रिज पर पुलिस और दलितों के बीच घर्षण भी हुआ जिसमें प्रकाश भाई मकवाना और यश मकवाना को गंभीर चोट आई और उन्हें एल जी हॉस्पिटल में दाखिल किया गया। दधीची ब्रिज पर हुए टकराव के बाद पुलिस पर दलितों के घर में घुस कर महिलाओं के बाल पकड़ कर पिटाई का आरोप लगा। डिटेन किये गए सभी लोगों को साढ़े छ बजे के बाद रिहा कर दिया गया लेकिन जिग्नेश मेवानी को रात के 9 बजे रिहा किया गया।

बंद का कॉल अहमदाबाद के लिए था लेकिन मेवानी की गिरफ़्तारी के बाद हिंसा राज्यव्यापी भड़क उठी हिम्मत नगर, गोंडल ,गाँधी नगर से स्टेट ट्रांसपोर्ट बस के रूट डाइवर्ट कर दिए गए। उंझा बस सर्विस को कुछ समय के लिए रोक दिया गया। गोंडल, पाटन, सिधपुर, मेहसाणा, उंझा, वडगाम, रापर इत्यादि जगहों पर दलितों ने उग्र प्रदर्शन किया।

इन सब के बीच मंत्रियों, अधिकारीयों और बीजेपी के दलित नेता भी समाधान के लिए पूरे दिन दौड़ते रहे और मीटिंग पर मीटिंग करते रहे सरकार ने एक रणनीति के तहेत जिग्नेश मेवानी को अलग कर कुछ दलित आगेवानों की मदद से भानु भाई के परिवार से समझौता करने का प्रयास करते रहे परन्तु भानु भाई की पत्नी इन्दुबेन ने जिग्नेश मेवानी की रिहाई होने तक किसी बातचीत से ही इंकार कर दिया।

इन्दुबेन ने कहा मैं चार दिन से अपने पति की लाश के साथ बैठी हूँ सरकार का यही रवय्या रहा अभी दस चार दिन और बैठ सकती हूँ। इंदु बेन ने एक गुजरात न्यूज़ चैनल को दिए इंटरव्यू में कहा “ जिग्नेश मेवानी चार दिन से यहाँ मेरे साथ है उसकी तबीअत भी ठीक नहीं है। जिग्नेश ने सरकार को साढे छह बजे तक योग्य निर्णय लेने को कहा था उसके बावजूद कोई निर्णय नहीं लिया गया। जिग्नेश भाई तथा अन्य लोगों ने 7 बजे तक राह देखा परन्तु सरकार की तरफ से कोई योग्य निर्णय नहीं लिया गया।

जिग्नेश भाई को मैं जानती हूँ और कह सकती हूँ वह जो कर रहे हैं अपने स्वार्थ के लिए नहीं कर रहे मेरे पति ने समाज के लिए शहादत दी है वह व्यर्थ न जाये इसका पूरा प्रयत्न कर रहे हैं। भानु भाई के परिवार द्वारा दिए गए बयान के बाद सरकार का षड्यंत्र फेल हो गया और बेकफुट पर जाना पड़ा।

सरकार ने लिखित तौर पर अधिकतर शर्तों को मान लिया है जिस के बाद परिवार ने मृदेह स्वीकार कर लिया है, स्वीकारी गई मांग निम्न है। उन दलितों को ज़मीन का भौतिक क़ब्ज़ा छ महीने में दे दिया जायेगा जिन्हें सनद दी जा चुकी है, दुद्ख गाँव जिस ज़मीन का प्रश्न था तीन दिन के अंदर महसूल विभाग लाभार्थी को क़ब्ज़ा दे देगा, पूरी घटना की जांच एस आई टी द्वारा कराई जाएगी, स्व. भानु भाई के नाम से अवार्ड देने पर विचार किया जायेगा, स्व. भानु भाई के पुत्र की बदली कर एक ही स्थान पर नौकरी की बदली पर सरकार सकारत्मक है, भानु भाई की प्रतिमा बनाने की मांग की सिफारिश उंझा नगर पालिका को की जाएगी, पुलिस अधिकारीयों को तीन दिन में जांच कर दोषित पाए जाने पर कार्यवाही की जाएगी, आन्दोलन में दलित कार्यकर्ताओं के खिलाफ केस वापस लिए जायेंगे। अधिकतर मांगे मान ली गई हैं।

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