म्यूजिक माफिया को लेकर अदनान सामी ने दिया बड़ा बयान!

म्यूजिक माफिया को लेकर अदनान सामी ने दिया बड़ा बयान!

सिंगर अदनान सामी ने भी म्यूजिक माफियाज के खिलाफ खुलकर बात की है।

 

बॉलीवुड और म्यूजिक इंडस्ट्री में नेपोटिज्म को लेकर बहस छिड़ी हुई है। सोनू निगम द्वारा कई बड़ी म्यूजिक कंपनियों को सवालों के घेरे में खड़ा किया गया।  सिंगर अदनान सामी ने भी म्यूजिक माफियाज के खिलाफ खुलकर बात की है।

 

संजीवनी टुडे पर छपी खबर है, अदनान सामी ने अपनी इंस्टा पोस्ट में लिखा, “भारतीय फिल्म और म्यूजिक इंडस्ट्री को वाकई बहुत जोर से झंकझोरने की जरूरत है।

 

 

खास तौर पर संगीत के संदर्भ में, नए सिंगर्स, पूर्व सिंगर्स, म्यूजिक कंपोजर्स और म्यूजिक प्रोड्यूसर्स जिन्हें उनके चरम तक शोषित किया जा रहा है।”

 

उन्होंने आगे कहा, आज्ञा का पालन करते जाओ नहीं तो आपको बाहर कर दिया जाएगा।

 

रचनात्मकता को उनके द्वारा क्यों नियंत्रित क्यों किया जा रहा है जिन्हें क्रिएटिविटी के बारे में कोई आइडिया ही नहीं है और वो भगवान बनने की कोशिश कर रहे हैं। ईश्वर की कृपा से हमारे पास 130 करोड़ भारतीय हैं – क्या हमारे पास देने के लिए सिर्फ रीमिक्स और रीमेक ही हैं?”

 

अदनान समी ने टाइम्स ऑफ इंडिया को दिये एक इंटरव्यू में कहा, ‘आप प्रतिभाशाली हैं तो आपको मौका मिलना चाहिए। अगर आपको मना किया जा रहा है तो चीजें बदलने की जरूरत है।

 

‘माफिया’ और ‘आउसइडर’ जैसे शब्दों के बारे में बात करते हुए अदनान ने कहा, ’मैं तो यहां सबसे बड़ा आउटसाइडर हूं, लेकिन मैंने खुद को जबरदस्ती यहां बनाए रखा।’

 

उन्होंने आगे कहा, ‘पिछले दो दशकों से यहां बहुत कुछ बदल गया है।’ अदनान के मुताबिक, लोग कुछ सुपरस्टार्स का नाम लेकर उदाहरण देते हैं कि वो भी आउटसाइडर थे लेकिन देखा जाए तो पहले की तुलना आज से नहीं की जा सकती है।

 

उस वक्त पर जो लोग मौका दिया करते थे वो लोग प्रतिभा को ‘तवज्जों’ दिया करते थे और खुद को सिक्योर महसूस किया करते थे। इस वक्त इंडस्ट्री में माफिया मौजूद हैं।

 

पहले के मुकाबले यहां चीजें अब बहुत अलग हो गई हैं। जिन भी लोगों में टैलेंट है उन्हें आगे लाने की जरूरत है या बिना किसी प्रताड़ना के उन्हें आगे आने दिया जाए। बॉलीवुड किसी के बाप की जागीर नहीं है।

 

अदनान ने आगे कहा, ईश्वर के लिए ये सब बंद करो और उन्हें सांस लेने का मौका दो जो वाकई में टैलेंटेड हैं और पुराने खिलाड़ी हैं। म्यूजिकली और सिनेमैटिकली उन्हें रचनात्मक सुकून दो।

 

फिल्मों और संगीत के माफियाओं तुमने खुद को अपने गुरूर से बांध रखा है, और खुद को स्वघोषित भगवान बना रखा है। क्या तुमने इतिहास से कुछ भी नहीं सीखा कि कला और रचनात्मकता के पर्यावरण को कभी नियंत्रित नहीं करना चाहिए।

 

बहुत हो गया। आगे बढ़ो। बदलाव आ गया है और अब ये आपके दरवाजों को खटखटा रहा है। आप तैयार हों या न हों ये आ रहा है। पीछे हट जाओ।

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