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10 घरों में झाड़ू-पोंछा करने वाली अफ़शां बनीं मिसाल, कॉलेज में फर्स्ट क्लास हुईं पास

प्रतीकात्मक तस्वीर

ये कहानी है 17 साल की ईलू अफशां की। ईलू बहुत आम सी लड़की है लेकिन उन्होंने जो किया है वो उन्हें ख़़ास बनाता है।

मुफ़लिसी में हजारों बच्चे स्कूल का मुंह तक नहीं देख पाते हैं और कुछ अपनी पढ़ाई बीच में ही छोड़ देते हैं। ना जाने कितने बच्चे तमाम सुख सुविधाओं के बावजूद पढ़ने में दिलचस्पी नहीं लेते हैं, उनके पास ना पढ़ने के लिए तमाम बहाने होते हैं लेकिन इन बच्चों के लिए मिसाल बनी है ईलू।

17 वर्षीय ईलू अफशां 10 से ज्यादा घरों में झाड़ू-पोंछा, बर्तन और कपड़े धोने, खाना बनाने का काम करती हैं। इसके बाद जो वक्त बचता है उसमें वह अपनी पढ़ाई करती हैं।

इतनी मुश्किलों से पढ़ाई करने के बाद भी ईलू ने गवर्नमेंट प्री-यूनिवर्सिटी कॉलेज की परीक्षा में अच्छे नंबर से पास हुई है। ईलू के कॉमर्स विषय में फर्स्ट क्लास से पास होने पर उसके सारे जानकार हैरत में हैं।

लेकिन रास्ते का रोड़ा सिर्फ़ गरीबी ही नहीं बनती है बल्कि हालात भी कई बार सामने खड़े हो जाते हैं।

बेंगलुरु मिरर की खबर के मुताबिक, कॉलेज की परीक्षा जब नजदीक थी, उसी दौरान ईलू के पिता बीमार हो गए थे। हालात इतने बुरे थे कि ईलू के पिता बिस्तर से ऊठ भी नहीं पा रहे थे। पिता घरों में पेंट का काम करते थे, लेकिन एक हादसे में वे पैर गंवा चुके हैं।

ऐसे में 10 घरों का काम करने के बाद ईलू को पिता की भी सेवा करनी पड़ रही थी, जिससे उसके पास परीक्षा की तैयारी के लिए बिल्कुल ही समय नहीं मिल पा रहा था।

होनहार ईलू की मां भी दूसरे के घरों में काम कर परिवार का खर्च चलाती थीं। लेकिन तबियत खराब होने के बाद उन्होंने भी काम छोड़ दिया। परिवार का खर्च चलाने के लिए ईलू ने मां की जगह दूसरे के घरों में काम करना शुरू कर दिया।

ईलू की कमाई से ही पूरे परिवार के खाने, मां-पिता के ईलाज और बहन-भाई की पढ़ाई का खर्च निकलता है। बहन ने इसी साल 10वीं की परीक्षा पास की है और भाई 8वीं में है।

ईलू अफशां चाहती हैं कि वह खुद के साथ अपने भाई-बहन को भी पढ़ा पाए और तीनों लोग अच्छी नौकरी पाने के काबिल हो सकें।

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