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मुजफ्फरनगर के बाद अब सहारनपुर दंगे के मामले वापस लेगी योगी सरकार

योगी आदित्यनाथ सरकार ने जहां एक ओर 2013 के मुजफ्फरनगर दंगों से संबंधित 131 मामले वापस लेने की प्रक्रिया शुरू की है वहीँ सहारनपुर बीजेपी नेतृत्व ने उन लोगों के खिलाफ मामलों को वापस लेने के लिए अपना प्रयास शुरू कर दिया है जो अप्रैल- 2017 में एसएसपी के कार्यालय पर हुए हमले से संबंधित हैं।

सहारनपुर के सांसद राघव लखनपाल और पूर्व विधायक राजीव गोलंबर समेत वरिष्ठ भाजपा नेताओं को भीड़ को भड़काने के लिए बुक किया गया था। गोलंबर ने बताया कि उन्होंने हाल ही में उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य से मुलाकात की और उन्हें एक पत्र दिया जो कानून मंत्रालय को भेज दिया गया है।

इन मामलों में फ़र्ज़ी आरोप लगाए गए थे जो राजनीति से प्रेरित थे। उन्होंने उपमुख्यमंत्री केशव मौर्य से मुलाकात की और इस तथ्य से अवगत कराया। पिछले साल 20 अप्रैल को अम्बेडकर जयंती पर एक जुलूस के दौरान दुधली गांव में दो समुदायों के बीच संघर्ष हुआ था। कई दुकानों को लक्षित किया गया जबकि कुछ वाहनों को जला दिया गया था।

लखनपाल ने कथित तौर पर मार्च का नेतृत्व किया था और जुलूस के लिए कोई अनुमति नहीं ली गई थी। एफआईआर के मुताबिक, जुलूस के दौरान कथित तौर पर सांसद और अन्य नेताओं की अगुआई में तत्कालीन एसएसपी लव कुमार के आधिकारिक निवास पर पहुंचे थे जिसे बर्खास्त कर दिया था।

दोनों समुदायों के 24 युवकों के साथ-साथ लखनपाल और गोलंबर के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की गई थी। इसके अलावा 300 अज्ञात दंगाइयों को बुक किया गया था। अन्य 11 लोगों को भी विभिन्न धाराओं में बुक किया गया था। बाद में ठाकुर और दलितों के बीच शब्बीरपुर गांव में पुलिस और दलितों के बीच सहारनपुर शहर में हुए संघर्षों में भीम सेना प्रमुख चंद्रशेखर आजाद के खिलाफ मामला दर्ज किया गया था।

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