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AIIMS के डॉक्टर्स पुरकशिश तनख़्वाहों के लिए दीगर ख़ानगी हॉस्पिटल्स से रुजू

मुल्क के अहम तरीन मेडीकल इंस्टीटियूट ऑल इंडिया इंस्टीटियूट आफ़ मेडीकल साइंसेस (AIIMS) में डॉक्टर्स की शदीद क़िल्लत पैदा हो गई है और फ़िलहाल सिर्फ 400 डॉक्टर्स ही अपनी ख़िदमात अंजाम दे रहे हैं जबकि हॉस्पिटल में 625 डॉक्टर्स की गुंजाइश मौजूद

मुल्क के अहम तरीन मेडीकल इंस्टीटियूट ऑल इंडिया इंस्टीटियूट आफ़ मेडीकल साइंसेस (AIIMS) में डॉक्टर्स की शदीद क़िल्लत पैदा हो गई है और फ़िलहाल सिर्फ 400 डॉक्टर्स ही अपनी ख़िदमात अंजाम दे रहे हैं जबकि हॉस्पिटल में 625 डॉक्टर्स की गुंजाइश मौजूद है जहां रोज़ाना 8000 मरीज़ों का ईलाज किया जाता है।

यहां इस बात का तज़किरा बेजा ना होगा कि पेशा तिब्ब में अब ख़िदमत‍ ए‍ ख़ल्क़ का जज़बा आहिस्ता आहिस्ता मादूम होता जा रहा है जहां डॉक्टर्स पुरकशिश तनख़्वाहों और काम के बेहतर माहौल के हुसूल के लिए ख़ूब से ख़ूबतर की जानिब खींचते चले जाते हैं और यही हाल AIIMS के डॉक्टर्स का भी है जहां वो पुरकशिश तनख़्वाहों के लिए दीगर ख़ानगी हॉस्पिटल्स और बैरून-ए-मुमालिक जा रहे हैं।

सिर्फ गुज़श्ता दस साल के दौरान आठ बेहतरीन डॉक्टर्स जिन में अपने महकमा के तीन सरबराह डॉक्टर्स भी शामिल हैं, एम्स छोड़कर चले गए। सर गंगा राम हॉस्पिटल के सर्जन डाक्टर अरविंद कुमार ने बताया कि उन्होंने एम्स इस लिए छोड़ दिया क्योंकि वहां उन की सलाहीयतों का इस्तेमाल नहीं किया जा रहा था बल्कि इस्तेहसाल हो रहा था।

सर्जरी के लिए उन्हें रोबोटिक इक्विपमेंट हफ़्ता में सिर्फ एक बार दिया जाता था जबकि दूसरे महकमों में इन की ज़रूरत हुई थी जिस का नतीजा ये हुआ कि चार साल के दौरान उन्हों ने सिर्फ 68 सर्जरीयाँ अंजाम दी जबकि यहां (सरंगा राम हॉस्पिटल) उन्हों ने 30 दिनों में ग्यारह सर्जरीयाँ अंजाम दी हैं। अब तक AIIMS के जिन डॉक्टर्स ने वहां से हमेशा के लिए रुख़स्त ले ली है।

इन में डाक्टर एच एच दास (नीरू एनेस्थीसिया के सरबराह), डाक्टर सुप्रियो घोष (ऑप्था लम्मू लो जी के सरबराह), डाक्टर रानी सुंदर (अस्सिटेंट प्रोफेसर अनीसथीवलोजी) , डाक्टर जान रानजन बीहारा (अस्सिटैंट प्रोफेसर आर्थोपेडिक्स) , डाक्टर विनय गुलाटी (डिपार्टमैंट आफ़ मेडीसिन) , डाक्टर सी वेंकटा कारतीकन (NT डिपार्टमेंट) और डाक्टर मनीष शर्मा (अस्सिटेंट प्रोफेसर, न्योरो सर्जरी) शामिल हैं। डाक्टर दास ने कहा कि उन्होंने एम्स में ज़ाइद अज़ 30 साल ख़िदमात अंजाम दी और उन्हें इंस्टीटियूट इंतिज़ामीया से कोई शिकायत नहीं है बल्कि रज़ाकाराना तौर पर सबकदोश (VRS) हो गए हैं।

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