Wednesday , September 26 2018

AIMS में लापरवाही, पेट दर्द महिला मरीज की डॉक्टर ने कर दी डायलिसिस से संबंधित सर्जरी

डॉक्टरों की लापरवाही की एक चौंका देने वाली घटना में एम्स के एक सीनियर डॉक्टर ने पेट दर्द से पीड़ित एक महिला की डायलिसिस के उपचार के लिए होने वाली एक सर्जरी करके फेस्टुला बना दिया। इसके बाद उन्होंने इस गड़बड़ी पर लीपा-पोती करने के लिए दस्तावेजों के साथ कथित रूप से छेड़छाड़ की।

एम्स के निदेशक के निर्देश पर डीन डॉ. वाई के गुप्ता की अध्यक्षता में एक समिति बनाई गई है जो इस घटना की जांच करेगी। सूत्रों ने बताया कि लापरवाही की घटना के केंद्र में सर्जरी विभाग के एक सहायक प्रोफेसर हैं।

सूत्रों ने बताया कि विभाग की संबंधित यूनिट के प्रमुख ने जांच के आदेश दिए थे, उस जांच के साथ-साथ मेडिकल सुपरिन्टेंडेंट ने भी सहायक प्रोफेसर को दोषी माना है। बिहार के सहरसा की रहने वाली रेखा देवी एम्स में उपचार के लिए आई थीं।

उनके गृहनगर के एक अस्पताल में उनके पेट की सर्जरी हुई जिसके बाद हुई जटिलताओं के उपचार के लिए वह यहां आई थीं। एम्स में सात फरवरी को उन्हें लोकल ऐनेस्थीसिया देकर पेट की जांच के लिए छोटे ऑपरेशन थियेटर ले जाया गया।

नर्सिंग रिपोर्ट के मुताबिक डॉक्टर को बताया गया कि मरीज को पेट दर्द की शिकायत है। लेकिन उन्होंने फिस्टुला बना दिया जिसका इस्तेमाल गुर्दे की बीमारी से पीड़ित मरीज की डायलिसिस प्रक्रिया के लिए होता है। इसके बाद मरीज से बातचीत में पता चला कि उन्हें किडनी संबंधी कोई समस्या नहीं है।

शुरूआती जांच रिपोर्ट के मुताबिक, ‘‘मरीज और उसके परिजनों को इस बारे में बताया गया और अगले दिन सही आपरेशन किया गया। मरीज का गलत ऑपरेशन किया गया लेकिन इसे मरीज के रिकॉर्ड में दर्ज नहीं किया गया।

हालांकि नर्सिंग रिपोर्ट बुक में इसका जिक्र है.’’घटना के बारे में इकाई के प्रमुख डॉ. सुनील चुम्बर को बताया गया जिन्होंने मामले की जांच कराई। इसमें पाया गया कि चिकित्सक ने गलत सर्जरी की और दस्तावेजों में बदलाव करके इस पर लीपा-पोती करने की कोशिश की।

इस जांच के नतीजे एम्स के निदेशक को सौंप दिये गये हैं.सूत्रों के मुताबिक मेडिकल सुपरिन्टेंडेंट डॉ. डीके शर्मा ने भी जांच के आदेश दिए थे, उसमें भी चिकित्सक को दोषी पाया गया और सहायक प्रोफेसर को हर तरह के क्लिनकल संबंधी कामकाज से हटाने का सुझाव दिया गया है।

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