Thursday , September 20 2018

अखिलेश और मायावती के बीच समझौते पर बातचीत, कैराना लोकसभा सीट है अगली परीक्षा

उत्तर प्रदेश और बि​हार में लोकसभा की तीन सीटों पर करारी हार के बाद भाजपा आलाकमान सकते में है। विपक्ष भी इस स्थिति को भुनाने में कोई कसर नहीं छोड़ रहा है और अखिलेश और मायावती के बीच समझौते पर बातचीत करेंगे। यूपी, बिहार, पंजाब, पश्चिम बंगाल और राजस्थान में हुए कुल 8 उपचुनावों में भाजपा को लगातार करारी हार हुई।

विपक्ष इस हार को वर्ष 2019 के लोकसभा चुनाव का ट्रायल बोल रहा है। एक बार फिर महाराष्ट्र के दो और यूपी के कैराना में लोकसभा के उपचुनाव होने हैं। तीनों ही सीट पर भाजपा के उम्मीदवारों ने जीत हासिल की थी। अब अगर भाजपा फिर से उपचुनावों वाला अपना इतिहास दोहराती है तो इसका ​सीधा असर ​आने वाले विधानसभा व लोकसभा चुनाव पर पड़ सकता है।

यूपी के कैराना लोकसभा सीट से हुकुम सिंह ने भाजपा के टिकट पर 2014 में जीत हासिल की थी। 4 फरवरी 2018 को उनके निधन से इस सीट पर फिर से उपचुनाव होना है। 2014 में तो मोदी लहर का लाभ मिला, लेकिन जिस तरह से एक के बाद एक उपचुनावों से भाजपा अपनी सीट गंवा रही है उससे कैराना की लोकसभा सीट पर खतरा मंडराना तय है। इस सीट पर चौधरी अजीत सिंह की पार्टी का काफी असर दिखता है, हालांकि अजीत सिंह के अलावा किसी पार्टी ने अपना कार्यकाल लगातार नहीं दोहराया है।

चिंतामन वनगा महाराष्ट्र के पालघर से लोकसभा सांसद थे। वह 11वीं और 13वीं लोकसभा के भी सदस्य रह चुके थे। 30 जनवरी 2018 को उनके निधन से पालघर सीट के लिए लोकसभा का उपचुनाव होना तय है।

19 फरवरी 2008 को पालघर लोकसभा सीट का निर्माण हुआ था। 2009 में इस सीट से बहुजन विकास अगाडी पार्टी के उम्मीदवार बलीराम जाधव जीते थे, इसके बाद 2014 में भाजपा के टिकट पर चिंतामन वनगा ने जीत पक्की थी। हालांकि अभी उपचुनावों की घोषणा नहीं की गई है।

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