Tuesday , December 12 2017

ख़त्म हो जाएगा 23 साल पुराना बैर, मायावती और अखिलेश एक साथ करेंगे रैली!

उत्तरप्रदेश की राजनीति में बड़ी उथल-पुथल हो सकती है। सारी कवायद बीजेपी को रोकने के लिए होगी। कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी के भोज में शामिल होने के बाद बसपा सुप्रीमो मायावती और सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव पहली बार एक साथ उत्तर प्रदेश में रैली कर सकते हैं।

टीओआई की रिपोर्ट के मुताबिक, इस संयुक्त रैली का आइडिया शुक्रवार को लंच समारोह के दौरान उस वक्त आया था, जब आरजेडी सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव ने अखिलेश और मायावती से एक साथ आने का अनुरोध किया था।

समाजवादी पार्टी सांसद नरेश अग्रवाल ने पुष्टि करते हुए कहा कि इस समारोह में संयुक्त रैलियां करने का प्रस्ताव सामने आया था और सभी बीजेपी विरोधी पार्टियों ने इसका समर्थन किया।

उन्होंने टीओआई से कहा, ‘वक्त की मांग है कि पूरा विपक्ष संयुक्त रूप से बीजेपी के खिलाफ खड़ा हो। उन्होंने कहा कि राष्ट्रपति चुनावों के बाद लालू प्रसाद यादव पटना में 27 अगस्त को एक विशाल रैली का आयोजन करेंगे।

हालांकि वरिष्ठ बसपा नेताओं ने इस बारे में संपर्क नहीं हो पाया। लेकिन बैठक में मौजूद रहे सूत्रों ने बताया कि मायावती ने भी इसका समर्थन किया है। सूत्र के मुताबिक ने मायावती ने कहा कि मैं 100 प्रतिशत आपके साथ हूं।

मायावती और अखिलेश की संयुक्त रैली 2019 के लोकसभा चुनावों से पहले बीजेपी विरोधी फ्रंट को एक रूप दे सकती है। मार्च में घोषित हुए यूपी विधानसभा चुनावों में मायावती और अखिलेश को बीजेपी के करारी हार का सामना करना पड़ा था, जिसके बाद से उनके साथ आने के कयास लगाए जा रहे थे।

2014 के लोकसभा चुनावों में बीएसपी को एक भी सीट नहीं मिली थी, जबकि सपा की सीटें 5 तक सिमट गई थीं। यह भी मालूम चला है कि लालू और टीएमसी चीफ ममता बनर्जी ने भी मायावती और अखिलेश यादव से 2019 के लोकसभा चुनाव के दौरान साथ आने को कहा है। शुक्रवार को लालू ने यूपी के संदर्भ में एकता पर जोर दिया।

लालू प्रसाद यादव ने कहा कि अगर सपा, बसपा और कांग्रेस साथ आ जाएं तो लोकसभा में 70 सीटें जीत सकती हैं। साल 1993 के बाद कभी बसपा और सपा साथ नहीं आईं। इससे पहले उन्होंने साथ में विधानसभा चुनाव लड़ा था, जिसमें उन्हें जीत मिली थी।

लेकिन दोनों के बीच कड़वाहट साल 1995 में उस वक्त बढ़ गई जब लखनऊ के एक गेस्ट हाउस में ठहरीं मायावती पर गुंडों ने हमला कर दिया था। उस वक्त यूपी के मुख्यमंत्री मुलायम सिंह यादव थे।

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