CAA के खिलाफ़ 144 याचिकाओं की सुनवाई पर देश की नज़र!

CAA के खिलाफ़ 144 याचिकाओं की सुनवाई पर देश की नज़र!

सर्वोच्च न्यायालय में नागरिकता संशोधन अधिनियम (CAA) की संवैधानिक वैधता को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सुनवाई शुरू हो गई है। इसकी सुनवाई चीफ जस्टिस एसए बोबडे, जस्टिस एस अब्दुल नजीर और जस्टिस संजीव खन्ना की पीठ सुनवाई कर रही है

 

खास खबर पर छपी खबर के अनुसार, अटॉर्नी जनरल ने कोर्ट को बताया कि उन्हें अभी तक 144 में से 60 याचिकाओं की ही कॉपी मिली है।

 

 

सुनवाई के दौरान चीफ जस्टिस एस. ए. बोबडे ने कहा है कि हम अभी कोई भी आदेश जारी नहीं कर सकते हैं, क्योंकि काफी याचिकाओं को सुनना बाकी है। ऐसे में सभी याचिकाओं को सुनना आवश्यक है।

 

अटॉर्नी जनरल ने अपील की है कि कोर्ट को आदेश जारी करना चाहिए कि अब कोई नई याचिका दायर नहीं होनी चाहिए।

 

SC में वकील वैद्यनाथन ने कहा है कि बाहर ऐसा मुस्लिम और हिंदुओं में डर है कि NPR की प्रक्रिया होती है तो उनकी नागरिकता पर सवाल होगा। अभी NPR को लेकर कोई साफ गाइडलाइंस नहीं हैं।

 

चीफ जस्टिस ने वकीलों से असम और नॉर्थ ईस्ट से दाखिल याचिकाओं पर आंकड़ा मांगा है। कोर्ट का कहना है कि असम का मसला अलग भी किया जा सकता है। इसको लेकर अलग सुनवाई भी की जा सकती है और कोर्ट ने पूछा है कि असम के मसले पर सरकार कब तक जवाब देगी?

 

सुप्रीम कोर्ट में नागरिकता संशोधन एक्ट पर दायर याचिकाओं को अलग-अलग कैटेगरी में बांट दिया है। इसके तहत असम, नॉर्थईस्ट के मसले पर अलग सुनवाई की जाएगी। वहीं, उत्तर प्रदेश में जो CAA की प्रक्रिया को शुरू कर दिया गया है उसको लेकर भी अलग से सुनवाई की जाएगी। अदालत ने सभी याचिकाओं की लिस्ट जोन के हिसाब से मांगी है, जो भी बाकी याचिकाएं हैं उनपर केंद्र को नोटिस जारी किया जाएगा।

 

चीफ जस्टिस ने कहा है कि पांच जजों की बेंच इस मामले पर सुनवाई करेगी कि इसपर स्टे लगाना है या नहीं। अब इस मसले को चार हफ्ते बाद सुना जाएगा और संवैधानिक पीठ बनाने पर भी फैसला किया जाएगा।

 

चीफ जस्टिस ने कहा है कि वह नई याचिकाओं पर रोक नहीं लगा सकते हैं, इसके अलावा हर केस के लिए एक वकील को ही मौका मिलेगा। याचिकाओं पर जवाब देने के लिए केंद्र को 4 हफ्ते का समय दे दिया गया है और अब पांचवें हफ्ते में सुनवाई होगी। वहीं दूसरी ओर असम से जुड़ी याचिकाओं पर केंद्र सरकार को दो हफ्ते में जवाब देना होगा।

 

इस पर कपिल सिब्बल ने कहा कि मुद्दा अभी ये है कि क्या मामले को संवैधानिक बेंच को भेजना चाहिए। साथ ही उन्होंने NPR की प्रक्रिया पर सवाल खड़े किए, जो कि अप्रैल में शुरू होने जा रही है।

अभिषेक मनु सिंघवी ने कहा कि यूपी में 40 हजार लोगों को नागरिकता देने की बात कही जा रही है, अगर ऐसा हुआ तो फिर कानून वापस कैसे होगा।

 

अदालत में वकील विकास सिंह, इंदिरा जयसिंह ने बताया है कि असम से 10 से अधिक याचिकाएं हैं, वहां पर मामला पूरी तरह से अलग है।

 

असम को लेकर अलग आदेश जारी होना चाहिए। कपिल सिब्बल की ओर से अपील की गई है कि अगर इस मामले पर स्टे नहीं लगता है तो तीन महीने के लिए इसे टाल दिया जाए।

 

चीफ जस्टिस ने इसपर कहा है कि मुझे नहीं लगता है कि कोई भी प्रक्रिया वापस ली जा सकती है और हम ऐसा आदेश लागू कर सकते हैं, जो मौजूदा स्थिति के अनुरूप होगा।

 

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