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मंत्रालय के दबाव में इलाहाबाद यूनिवर्सिटी ने छात्रों को नहीं दी ‘लिबर्टी फेस्ट’ की इजाज़त !

इलाहाबाद यूनिवर्सिटी में एक बार फिर प्रबंधन और स्टूडेंट्स में विवाद की स्थिति पैदा हो गई है । जिसकी वजह है विश्वविद्यालय में होने वाला लिबर्टी फेस्टिवल । आयोजनकर्ताओं का कहना है कि पहले कुलपति ने इसकी इजाज़त दी थी लेकिन बाद में इसे कैंसिल कर दिया ।

दरअसल स्टूडेंट्स और कार्यकर्ताओं की जॉइंट एक्शन कमेटी (JAC) द्वारा कैंपस में लिबर्टी फेस्टिवल मनाया जाना था। विश्विद्यालय प्रशासन ने पहले इसकी इजाजत भी दे दी थी, लेकिन अचानक प्रशासन ने अपना फ़ैसला बदल दिया ।

“जश्न-ए-संविधान” प्रोग्राम के तहत सोमवार को भारतीय संविधान के मूल सिद्धांतों पर चर्चा होनी थी । इसमें स्टूडेंट्स, प्रोफेसर और सिविल सोसाइटी को हिस्सा लेना था। आयोजकों के मुताबिक वाइस चांसलर आर एल हांगलू कार्यक्रम में चीफ गेस्ट थे । इवेंट के प्लानर मनीष कुमार ने बताया कि रविवार शाम को हमें मौखिक तौर पर बताया गया कि सीनेट हॉल को इस फेस्ट के लिए नहीं दिया जा सकता है। कुलपति भी इस प्रोग्राम में शामिल नहीं होंगे।

जेएसी ने आरोप लगाया कि राइट-विंग के छात्रों ने इसके खिलाफ एक अभियान चलाया । इसमें आयोजकों, गेस्ट और प्रोग्राम को “राष्ट्रविरोधी” कहते हुए, इसे जेएनयू में जोड़कर देखा गया। हालांकि कुलपति ने द इंडियन एक्सप्रेस को बताया कि विश्वविद्यालय के अधिकारियों को प्रमुख व्यक्तियों की उपस्थिति को लेकर गुमराह किया गया था।

कुलपति ने कहाकि परमिशन के लिए जो लेटर दिया गया था उसमें ऐसे गेस्ट्स के नाम थे जो इस फेस्ट में आ ही नहीं रहे थे। यहां तक की मुझे बिना बताए मेरा ही नाम चीफ गेस्ट की जगह डाल दिया गया।

अब मनीष कुमार ने वीसी के नाम ओपन लेटर लिखा है। मनीष ने लिखा है कि जब मैंने फोन पर आपसे इसकी अनुमति के बारे में पूछा तो आपने दे दी। बाद में कहा कि अनुमति पूरे इलाहाबाद में कहीं भी आयोजित करने की थी । जब मैने इसके लिए यूनिवर्सिटी के एक हाल की बात की तो आपने कहा कि मानव संसाधन विकास मंत्रालय से बहुत दबाव के चलते अनुमति वापस ली जा रही है।

इस पर वीसी ने कहा कि अनुमति वापस लेने के पीछे किसी का कोई दवाब नहीं है। हॉल के लिए बिजली की जरूरत होती है इसमे काफी खर्च आता है।

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