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अलवर उपचुनाव: पहलू खान की हत्या वाली संसदीय क्षेत्र में कहीं नहीं जीत पाई बीजेपी!

अलवर। राजस्थान उपचुनाव के नतीजे सत्ता सुख भोग रही बीजेपी को जैसे झकझोर कर जगाने के लिए आएं हो। राज्य में विधानसभा चुनाव को लेकर महज कुछ ही महीने बाद बीजेपी वोट मांगने के लिए जनता के दरबार में होगी; उससे पहले अलवर, अजमेर और मांडलगढ़ के नतीजों ने पार्टी को सोचने के लिए मजबूर कर दिया है।

इतने जोरदार एंटी इनकमबेंसी फैक्टर की उम्मीद बीजेपी को भी नहीं थी। लेकिन पार्टी जनता का गुस्सा भांप नहीं पाई। अलवर में बीजेपी की बड़ी किरकिरी हुई।

यहां पर लोकसभा का उपचुनाव लड़ने के लिए पार्टी आलाकमान ने वसुंधरा सरकार में कैबिनेट मंत्री जसवंत सिंह यादव को मैदान में उतारा था। बहरोड़ के विधायक और अलवर से बीजेपी कैंडिडेट जसवंत यादव इस उपचुनाव में 1 लाख 96 हजार 496 वोटों के भारी अंतर से कांग्रेस डॉ कर्ण सिंह से हारे।

यहां ये बता दें कि बहरोड़ का जिक्र होते ही अप्रैल 2017 के पहलू खान हत्याकांड की याद ताजा हो जाती है। अलवर के बहरोड़ में ही 1 अप्रैल 2017 को कथित गौरक्षकों ने हरियाणा के नूह के पशु व्यापारी पहलू खान की पीट-पीटकर हत्या कर दी थी।

इस उपचुनाव में बीजेपी बहरोड़ में तो हारी ही बाकी सात विधानसभा क्षेत्र में भी पार्टी कांग्रेस से अच्छे खासे अंतर से पीछे रही। जबकि इन्हीं सीटों पर 2013 के विधानसभा चुनाव और 2014 के लोकसभा चुनाव में बीजेपी भारी अंतर से जीती थी।

2014 के लोकसभा चुनाव में अलवर सीट पर बीजेपी के महंत चांदनाथ ने कांग्रेस भंवर जितेन्द्र सिंह को 2 लाख 83 हजार वोटों के अंतर से मात दी थी।

बहरोड में जहां पहलू खान पर हमला हुआ था उस विधानसभा में इस उपचुनाव में बीजेपी को 56 हजार 10 वोट मिले, जबकि कांग्रेस को 77 हजार 836 वोट हासिल हुए।

जबकि 2014 के लोकसभा चुनाव में इस सीट पर बीजेपी को 74 हजार 919 वोट मिले थे, जबकि कांग्रेस को मात्र 45 हजार 313 वोट हासिल कर पाई थी।

इस उपचुनाव में अलवर के बहरोड़ के अलावा दूसरी विधानसभाओं जैसे किशनगढ़ बास, रामगढ़, तिजारा, अलवर शहर, अलवर ग्रामीण, मुंडावर, राजगढ़, लक्ष्मणगढ़ में भी मतदाता बीजेपी से नाराज दिखे, इन सभी सीटों पर बीजेपी कांग्रेस से पीछे रही।

राजनीतिक विश्लेषकों की मानें तो पहलू खान के मामले से अलवर में ध्रुवीकरण पहले से ही था, इसके बाद जब यहां उपचुनाव की नौबत आई तो सत्ता के खिलाफ लोगों को अपना गुस्सा दिखाने का मौका मिल गया।

अलवर में लगभग 18 लाख 18 हजार मतदाता है, इसमें से मुस्लिम वोटरों की तादाद करीब साढ़े तीन लाख है। यूं तो मुसलमान वोटरों को बीजेपी के खिलाफ माना जाता है।

पर पहलू खान की मौत के बाद मुस्लिम वोटरों में गोलबंदी हुई और गुस्सा पनपा। कांग्रेस इस गोलबंदी और गुस्से को अपने पक्ष में करने में कायम रही।

सौजन्य- जनसत्ता

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