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अब अमृत्य सेन की ज़बान पर बोर्ड ने चलाई कैंची, कहा- गाय, गुजरात, हिन्दू भारत नहीं बोल सकते

भारतीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड (सीबीएफसी) आजकल अपनी काट छांट नीति की वजह से सुर्ख़ियों में रहने लगा है। अब बोर्ड ने नोबेल पुरस्कार विनर अमर्त्य सेन की जबान पर कैंची चलाई है।

सीबीएफसी ने कोलकाता के एक अर्थशास्त्री सुमन घोष की डॉक्यूमेंट्री “द आर्ग्यूमेंटेटिव इंडियन” में अमर्त्य सेन द्वारा कहे गए “गुजरात”, “हिन्दू भारत”, “गाय” और “भारत का हिंदुत्ववादी दृष्टिकोण” जैसे शब्दों को हटाने के लिए कहा है।

लेकिन सुमन घोष ने अपनी फिल्म का बीप के साथ प्रदर्शन करने से इनकार कर दिया है। घोष मियामी के विश्वविद्यालय में अर्थशास्त्र पढ़ाते हैं।

सीबीएफसी के अधिकारियों ने घोष से कहा कि अगर वो “गुजरात”, “हिन्दू भारत”, “गाय” और “भारत का हिंदुत्ववादी दृष्टिकोण” जैसे शब्दों को बीप कर दें तो उन्हें “यूए” प्रमाणपत्र मिल सकता है।

फिल्म में देश के वर्तमान राजनीतिक हालात पर बातचीत के दौरान इन शब्दों का प्रयोग हुआ है।

घोष ने टेलीग्राफ से कहा कि सेंसर बोर्ड के रवैये से इस डॉक्यूमेंट्री की जरूरत और भी साफ हो जाती है।

घोष ने कहा कि एक लोकतांत्रिक देश में सरकार की आलोचना पर ऐसा प्रतिबंध हैरान कर देने वाला है।

घोष ने साफ किया कि “हमारे समय के सर्वश्रेष्ठ चिंतकों में से एक” के कहे शब्दों को मैं किसी भी हालात में म्यूट या बीप नहीं करूंगा।

“द आर्ग्यूमेंटेटिव इंडियन” अमर्त्य सेन की प्रसिद्ध किताब है। किताब में सेन ने भारत की बहस और संवाद की पुरातन परंपरा का जिक्र करते हुए स्थापित किया है कि वाद-विवाद-संवाद भारत की थाती है।

 

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