Monday , January 22 2018

आंबेडकर जयंती: ‘यही है आपकी सभ्यता, संस्कृति और परम्परा तो मुझे इससे अलग समझिए’

एक बार प्यास के मारे मेरा दम निकलने को था। स्कूल से वापस लौटते वक्त मैं कुवें पर चढ़ एक बाल्टी से पानी निकाल पीने लगा। इतने में एक सवर्ण ने दूर से ही चिल्लाते हुए ‘अबे म्हार, तूने पूरा कुवां अपवित्र कर दिया’ मारने को दौड़ा। उसके चिल्लाने से आस पास के और भी बहुत लोग जमा हो गए। उन सबने मुझे इतना मारा की मेरा पूरा बदन नीला पड़ गया।

मैं कई दिनों तक बिस्तर पर पड़ा रहा। ऐसी ही एक शाम बारिश हो रही थी। किसी अनजान मकान की दिवार का ओट लेकर मैं खड़ा हो गया,भीतर से मकान मालिकन निकली,मेरी पहचान जान लेने के बाद उसने अपनी लाठी से इतना जोर का प्रहार किया कि मेरे पैर में कई दिनों तक सूजन रही। बड़ौदा नरेश के यहाँ नौकरी मिली।स्टेशन के पास होटल में रात बिताने के लिए कमरा खोजने निकला।

जहाँ जाता वहां मेरी जाति जानने के बाद कोई कमरा नहीं देता। जब बहुत रात हो गई तो एक पारसी के यहाँ कमरा मिला उसने भी मेरी पहचान जान ली तो सामान निकाल दिया बाहर। मैंने एक पेड़ के नीचे रात गुजारी। उस रात मैं दहाड़ मार कर रोता रहा बहुत देर तक।

बाबा साहेब भीमराव आंबेडकर द्वारा धर्म परिवर्तन की घोषणा के पक्ष में महात्मा गांधी को दिया गया जवाब।

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