Wednesday , April 25 2018

रोहिंग्या मुस्लिमों को जानबूझकर भूख से तड़पने दिया ताकि देश छोडने पर मजबूर हो जायें: रिपोर्ट

एमनेस्टी इंटरनेशनल ने कहा की म्यांमार में अधिकारियों ने रोहींग्या मुस्लिमों को लूटा, लड़कियों का अपहरण किया और जानबूझकर कर रोहंग्या पुरुषों, महिलाओं और बच्चों को भूख से तड़पने दिया, ताकि अल्पसंख्यक समूह के सदस्यों के लिए “इतना असहनीय” बन सकें की वे देश छोड़कर चले जाये। बुधवार को जारी एक ब्रीफिंग में मानवाधिकार समूह ने कहा कि रोहंग्या के खिलाफ “जातीय सफाई” जारी है, पिछले अगस्त में उत्तरी रखाईन राज्य में हिंसक कार्रवाई की शुरूवात हुयी थी, जिनमें करीब 690,000 म्यांमार से भाग गए थे।

एमनेस्टी की रिपोर्ट के मुताबिक सुरक्षा बलों ने रोहींग्या परिवारों को चेकपोइंट पर लूटा जब वे लोग बांग्लादेश पलायन करने की कोशिश में थे, और महिलाओं और लड़कियों को उनके गांवों से अपहरण करने की कोशिश किया। इस डर ने रोहींग्या को म्यांमार से पलायन करने के लिए प्रेरित किया है। हालांकि, रोहंग्या ने कहा कि देश से लगातार पलायन करने का मुख्य कारण है भोजन की कमी।

रखाईन राज्य के बूथिदांग के निकट एक गांव में 30 वर्षीय दिलबर बेगम एमनेस्टी इंटरनेशनल से कहा की “हम भोजन पाने में सक्षम नहीं थे, इसीलिए हम भाग रहे हैं,”  एएमनेस्टी ने कहा म्यांमार की सुरक्षा बलों के कार्यों की वजह से भोजन की कमी का कारण बनता जा रहा है, जो रोहंग्या को अपने खेतों, बाजारों और मानवीय सहायता तक पहुंचने से रोक रहे हैं ।

एमनेस्टी ने कहा, “म्यांमार के अधिकारियों द्वारा की गयी जानबूझकर कार्रवाई … असंख्य रोहंगियों को भूख से पीड़ित कर रहे हैं जिन्होंने अपने गांवों में रहने की कोशिश की है।”  एमनेस्टी ने बांग्लादेश में आयोजित एक साक्षात्कार पर आधारित अपने निष्कर्षों पर आया की दिसंबर और जनवरी में 11 रोहींग्या पुरुष और 8 महिलाएं अपने घर से भाग गए थे। एमनेस्टी की रिपोर्ट में कहा गया है की “हत्याओं के माध्यम से आबादी को आतंकित करने के बजाय, सुरक्षा बलों ने लोगों को देश से बाहर निकालने के लिए मुख्य रूप से शांत और अधिक सूक्ष्म उपायों का उपयोग किया है, ताकि उसके जीवन को इतना असहनीय बना दिया जा सके कि उन्हें देश छोड़ने के अलावा अन्य कोई विकल्प नहीं बचे”

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