Wednesday , September 19 2018

फलस्तीन- इजरायल में हिंसा का जिम्मेदार संयुक्त राष्ट्र: अमरीका

संयुक्त राष्ट्र में अमरीकी प्रतिनिधि निक्की हेली ने कहा, ‘संयुक्त राष्ट्र इसराइल के प्रति शत्रुता दिखाने वाला दुनिया का एक प्रमुख केंद्र है.’ निक्की हेली संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की एक आपातकालीन बैठक को संबोधित कर रही थीं. उन्होंने संयुक्त राष्ट्र की बैठक में कहा, ‘यरूशलम ही इसराइल की राजधानी है और अमरीका शांति समझौते को मानने के लिए प्रतिबद्ध है. उन्होंने कहा ‘इसराइल को संयुक्त राष्ट्र या अन्य देशों के संगठन के ज़रिए ऐसे प्रस्ताव के लिए बाध्य नहीं किया जा सकता जो उसकी सुरक्षा के लिए ख़तरा पैदा करे.’

इस बैठक में मौजूद इसराइली प्रतिनिधि डैनी डेनन ने अमरीका के फ़ैसला का स्वागत किया और राष्ट्रपति ट्रंप को धन्यवाद भी दिया, उन्होंने इस फ़ैसले को इसराइल और पूरे विश्व में शांति स्थापित करने के लिए एक मील का पत्थर बताया. वहीं फ़लस्तीनी प्रशासन के राष्ट्रपति महमूद अब्बास और दुनिया में सुन्नी मुसलमानों की सबसे बड़ी संस्था, मिस्र स्थित अल-अज़हर मस्जिद के इमाम ने भी अमरीका के उप राष्ट्रपति माइक पेन से मुलाकात की बातों से इनकार किया है. इस सबके अलावा फ़लस्तीनियों के मुख्य वार्ताकार सैब इरेकत ने कहा है कि वे तब तक अमरीका से बातचीत नहीं करेंगे जब तक राष्ट्रपति ट्रंप अपने फ़ैसले को वापिस नहीं ले लेते.

राष्ट्रपति ट्रंप के यरूशलम को इसराइल की राजधानी मानने के फ़ैसले के बाद से ही पूरे मध्य पूर्व में तनाव बना हुआ है. इसराइल लंबे समय से यरूशलम को अपनी राजधानी बताता रहा है, जबकि फ़लस्तीनी प्रशासन का दावा है कि पूर्वी यरूशलम उसकी भविष्य की राजधानी है जिस पर इसराइल ने 1967 के युद्ध में कब्ज़ा जमा लिया था.

गौरतलब है की हिंसा की इस कड़ी में वेस्ट बैंक में हज़ारों की संख्या में फ़लस्तीनी नागरिकों ने विरोध प्रदर्शन किए और सड़कों पर निकल आए. अमरीकी राष्ट्रपति के इस फ़ैसले की चारों तरफ़ निंदा हो रही है और इसराइली कब्ज़े वाले वेस्ट बैंक में हिंसक झड़पे भी हुई हैं. फ़लस्तीनी सेना ने इसराइली इलाक़ों में रॉकेट दागे, वहीं इसके जवाब में इसराइल ने भी गाज़ा पट्टी में हवाई हमले किए जिसमें कुछ लोग घायल भी हुए हैं. साथ ही इसराइल ने कहा है कि उसने हमास के चरमपंथी संगठनों को निशाना बनाया है. इसराइली सेना के अनुसार उन्होंने शनिवार सुबह हमास के हथियार निर्माण स्थल और आयुध भंडार पर हमला किया है. शुक्रवार सुबह जब इसराइली सेना ने गज़ा में भीड़ पर हमला किया तो इसमें तो दो फ़लस्तीनी नागरिक मारे गए.इसराइल ने स्थिति पर क़ाबू पाने के लिए सैकड़ों अतिरिक्त सुरक्षाबलों को तैनात किया है. प्रदर्शनकारियों ने गाड़ियों के टायरों में आग लगाई और सुरक्षाबलों पर पत्थर फेंके. जवाबी कार्रवाई में इसराइली सुरक्षाबलों ने आंसू गैस के गोले छोड़े और रबर की गोलियां और फ़ायरिंग की. ग़ज़ा पट्टी में फ़लस्तीनी नागरिकों ने सीमा पार तैनात इसराइली सैनिकों के ऊपर पत्थर फेंके. इसराइली सैनिकों ने जवाब में गोलियां चलाईं.

इतना ही नहीं कई अन्य देशों में अमरीका के फ़ैसले के विरोध में प्रदर्शन हुए. मलेशिया, बांग्लादेश, पाकिस्तान, अफ़ग़ानिस्तान, इंडोनेशिया और भारत प्रशासित कश्मीर में भी विरोध स्वरूप रैलियां निकाली गईं.

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