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संवेदशील तटीय कर्नाटक क्षेत्र में अमित शाह का तीन दिवसीय दौरा

कांग्रेस ने दावा किया है कि भाजपा धीरे-धीरे कर्नाटक के तटीय जिलों में सांप्रदायिक हिंसा फैला रही है। मुख्यमंत्री सिद्दारमैया ने कई अवसरों पर खुलासा किया है कि राज्य के विभिन्न हिस्सों में सांप्रदायिक घटनाओं के पीछे भाजपा और संघ परिवार का हाथ है।

उन्हें नियंत्रित करने के लिए उन्होंने पुलिस को सख्त निर्देश जारी किए हैं ताकि उनकी गतिविधियों पर सतर्क रहें। लेकिन, इन क्षेत्रों में कथित हिंदू कार्यकर्ताओं की लगातार झड़प और मौतों ने भाजपा को राज्य सरकार के खिलाफ हथियार दे दिया है।

कर्नाटक में सांप्रदायिक रूप से संवेदनशील तटीय जिलों, दक्षिणी कन्नड़, उडुपी और उत्तर कन्नड़ में अपनी स्थिति मजबूत करने के लिए भाजपा मजबूत अभियान शुरू करने जा रही है, जिसमें भाजपा प्रमुख अमित शाह रैलियों में शामिल होंगे।

इसके अलावा प्रमुख मंदिरों में जायेंगे और दो उन लोगों के परिजनों को मिलेंगे जो हाल ही में हुई सांप्रदायिक हिंसा मारे गए थे। शाह 20 और 21 फरवरी को राज्य के तटीय क्षेत्र का दौरा करेंगे।

राज्य भाजपा द्वारा घोषित दौरे के मुताबिक पार्टी कार्यकर्ताओं को मिलने और सार्वजनिक सभाओं को संबोधित करने के अलावा शाह दीपक राव और परेश मेस्टा के घर जायेंगे। दोनों इस क्षेत्र में सांप्रदायिक हिंसा के शिकार होने का संदेह है।

इन क्षेत्रों में वोट बैंक को और मजबूत करने के लिए भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह आगामी राज्य चुनावों के प्रचार के लिए तटीय क्षेत्र में तीन दिवसीय दौरे पर हैं। भाजपा के सूत्र बताते हैं कि ‘हिंदुत्व’ एक महत्वपूर्ण मुद्दा होगा।

शाह इन जिलों में भाजपा और आरएसएस कार्यकर्ताओं से मिलेंगे। अपने दौरे के दौरान क्षेत्र के प्रमुख मंदिरों में जायेंगे और मंगलूरु, बंटवाल, पुत्तूर और सूलिया में बैठकें आयोजित करेंगे।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना ​​है कि ये ऐसी बैठकें हैं जो कर्नाटक में भाजपा के चुनाव प्रचार का अभियान होंगी। राज्य में भाजपा को उम्मीद है कि अमित शाह भगवा पार्टी के लिए हिंदू वोटों को अपने पक्ष में कर लेंगे। दूसरी तरफ कांग्रेस को इस बार भाजपा की रणनीति का सामना करना मुश्किल होगा।

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