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औरंगाबाद का तब्लीगी जमात का इज्तेमा : उलेमा ने कहा, मुसलमानों को सच्चा मुसलमान बनना चाहिए

औरंगाबाद। शनिवार से यहां शुरू हुए तब्लीगी जमात के इज्तेमा के अंतिम दिन सोमवार को देश-विदेश से आये लाखों मुस्लिमों के चलते इज्तेमागाह पूरा भर गया। इज्तेमा में दक्षिण एशियाई मुसलमानों से अपील की गई।

यह इज्तेमा लोगों के नैतिक सुधार और स्वयं की शुद्धि के लिए है। मुसलमानों को सच्चा मुसलमान बनना चाहिए और उनको इस्लाम के बुनियादी सिद्धांतों को अपनाना चाहिए ताकि वे अपने निजी जीवन इस्लाम की तालीम को उतार सकें।

यह एक अक़ीदे का आंदोलन है। तीन दिन के इस इज्तेमा ने पूरी दुनिया का ध्यान आकर्षित किया है, जिसमें लाखों लोगों ने शिरकत की है। इज्तेमा आंदोलन का प्रतीक बन गया है। इज्तेमा केवल तब्लीग जमात के कार्यकर्ताओं में ही लोकप्रिय नहीं बल्कि उन लोगों में प्रिय है जो सक्रिय रूप से इसके साथ नहीं जुड़े हैं।

हालांकि हज इस्लाम में फ़र्ज़ है जो आर्थिक रूप से संपन्न मुस्लिम के लिए अनिवार्य है लेकिन संख्या में भाग लेने वाले लोगों की वजह से, भारत, बांग्लादेश, पाकिस्तान जैसे देशों में इज्तेमा वैश्विक तब्लीगी जमात के कार्यकर्ताओं के लिए एक तीर्थ यात्रा बन गई।

हालांकि, बांग्लादेश में एन्थ्रोपोलॉजिकल अनुसंधान का कोई प्रमाण नहीं पाया जा सकता है। यूरोपीय जर्नल में यह भी पता चलता है कि इज्तेमा में भागीदारी धार्मिक अधिकार और स्थिति को बढ़ाती है, जो समाज के भीतर धार्मिक सशक्तिकरण के साधन के रूप में कार्य करता है।

लाखों की तादाद में मुसलमानों के आगमन से आयोजकों ने अपील की है कि वे धैर्य रखें और सोमवार को आखिरी दिन दुआ के बाद घर रवाना होते हुए अनुशासन का पूरा ख्याल रखें।

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