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औरंगाबाद हिंसा: आगजनी में करीब 100 दुकानें जलकर खाक़!

दो समूहों की झड़प ने यहां हिंसक रूप अपना लिया, जिसमें करीब 100 से ज्यादा दुकानों में आग लगा दी गई. शुरुआती रिपोर्ट में बताया जा रहा है कि पानी को लेकर पहले तो दो गुटों में मारपीट हुई और उसके बाद मारपीट हिंसा में तब्दील हो गई. हालांकि हिंसा के पीछे की वजह आपसी रंजिश और पुरानी दुश्मनी भी बताई जा रही है.

आगजनी में 100 से ज्यादा दुकानें जलकर खाक हो गईं और पूरा बाजार लगभग तबाह हो गया. इलाके में धारा 144 लागू कर दी गई है. घटनास्थल और उसके आसपास के इलाकों में स्थिति पर नियंत्रण के लिए भारी संख्या में सुरक्षाबलों को तैनात किया गया है. भाजपा ने लोगों से अफवाह पर ध्यान न देते हुए शांति बनाए रखने की अपील की है.

औरंगाबाद के पुलिस कमिश्नर के मुताबिक, ‘एक होटल में दो लोगों में झगड़ा हुआ, फिर दोनों के समर्थक आ गए, फिर भीड़ इकट्ठी हो गई, अफवाह फैल गई दो समाज के लोगों के बीच मार पीट हो गई.’ पुलिस अधिकारी ने बताया कि यह दो अलग-अलग समुदाय का मामला है. पुलिस घटना के दौरान ही मौके पर पहुंच गई थी, लेकिन कंट्रोल नहीं कर पाई और मामले ने रात तक और तूल पकड़ लिया. इसके साथ ही उन्होंने बताया कि आरोपी की जानकारी प्रशासन जुटा रहा है.

यह घटना शुक्रवार (11 मई) शाम तकरीबन 6 से 7 के बजे के आस पास हुई जब मस्जिद में लगे एक अवैध नल को तोड़ दिया गया. नल को तोड़ने के बाद दूसरा गुट भड़क गया और दोनों आपस में भिड़ गए.

हिंसा में दो व्यक्ति की मौत, जबकि कई लोगों के जख्मी होने की खबर है. जोन-वन डीसीपी विनायक ढाकने के मुताबिक प्रभावित इलाकों में भारी तादाद में पुलिसवालों की तैनाती की गई है.

वहीं उन्होंने उपद्रवियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करने का भी भरोसा दिलाया है. महाराष्ट्र के गृह राज्य मंत्री ने भी आम लोगों से अफवाहों पर ध्यान ना देने की अपील की है. हालांकि विवाद किस बात पर शुरू हुआ ये भी अभी तक साफ नहीं हो सका है, लेकिन घटना के लिए तीन अलग-अलग वजहें बताई जा रही हैं.

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