Wednesday , January 24 2018

बातचीत पहले भी हो चुकी है, सुप्रीम कोर्ट अब फैसला सुनाए: बाबरी एक्शन कमेटी

बाबरी मस्जिद एक्शन कमेटी ने सुप्रीम कोर्ट उस प्रस्ताव को ठुकरा दिया है जिसमें उसने आज कहा था कि दोनों पक्षों को मिल-बैठकर बाबरी मस्जिद विवाद को सुलझाना चाहिए।

इस मामले पर बाबरी मस्जिद एक्शन कमेटी का कहना है कि पहले कई बार बातचीत हो चुकी है लेकिन नतीजा कुछ भी नहीं निकला। कमेटी का मामना है कि बातचीत का मतलब सीधे सरेंडर करना है।

बीबीसी की खबर के मुताबित, कमेटी के एक सदस्य सैयद कासिम रसूल इल्यास ने कहा है कि इलाहाबाद हाईकोर्ट के तरफ से साल 2010 का फैसला आने से पहले, प्रधानमंत्री वी.पी. सिंह के जमाने में विश्व हिन्दू परिषद् के साथ कई बार बातचीत हुई। लेकिन उसका कोई नतीजा नहीं निकला।

उन्होंने कहा है कि जब दूसरी पार्टी ने ये कह दिया है कि यह राम जन्म भूमि है और यह हमारी आस्था से जुड़ी है तो फिर हमारे तरफ से इसके आगे क्या बात की जाए। उन्होंने इल्जाम लगाया कि अदालत चूंकि फैसला करने से कतरा रही है इसलिए यह प्रस्ताव पेश किया है।

उन्होंने कहा कि अदालत के पास मामला समझौता कराने के लिए नहीं गया है। मामले पर फैसला करने के लिए गया है। अदालत का काम इन्साफ करना है, समझौता कराना नहीं है। उन्होंने उसके आगे कहा कि अदालत का जो भी फैसला होगा उन्हें वह मंजूर है।

बता दें कि कोर्ट ने मंगलवार को कहा था कि चूंकि ये मामला धर्म और आस्था से जुड़ा मामला है और यह संवेदनशील भी है इसलिए इसका हल आपसी बातचीत से हो। हालांकि अदालत ने साफ किया था कि अगर दोनों पक्ष मिल बैठकर बात करें तो कोर्ट उसमें मध्यस्थता करने को तैयार है।

गौरतलब है कि भाजपा नेता सुब्रमण्यम स्वामी ने सुप्रीम कोर्ट में बाबरी बनाम राम मंदिर मामले पर तुरंत सुनवाई के लिए याचिका दायर की हुई है।

 

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