संयुक्त सचिव पद पर निजी क्षेत्र के विशेषज्ञों को लाने वाले फैसले से नौकरशाह नाखुश

संयुक्त सचिव पद पर निजी क्षेत्र के विशेषज्ञों को लाने वाले फैसले से नौकरशाह नाखुश
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नई दिल्ली। निजी क्षेत्र के विशेषज्ञों को लाने वाले निर्णय से नौकरशाही असहज है। कई वरिष्ठ अधिकारियों ने यह संकेत दिया कि इस प्रस्ताव पर जवाब से अधिक सवाल उठते है। रविवार को सरकार ने संयुक्त सचिवों की 10 पदों को अधिसूचित किया था।

इस कदम को “रेट्रोग्रेड” के रूप में संबोधित करते हुए वरिष्ठ नौकरशाह जो नाम उद्धृत नहीं करना चाहते थे, ने कहा कि सुधार लाने के बजाय निजी क्षेत्र से भर्ती के परिणामस्वरूप एक प्रणाली होगी जिसके पास उत्तरदायित्व नहीं है।

जिन व्यक्तियों को इस तरह के पार्श्व प्रवेश के माध्यम से लाया जाएगा उन्हें अधिकतम पांच वर्ष का कार्यकाल होगा। गौरतलब है कि संयुक्त सचिव स्तर पर केंद्रीय सेवाओं के अधिकारियों की कम संख्या से जूझ रही सरकार ने निजी क्षेत्र में उच्च पदस्थ लोगों को सीधे संयुक्त सचिव नियुक्त करने का फैसला किया है।

कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग ने ऐसे 10 पदों के लिए अधिसूचना भी जारी कर दी है। इच्छुक उम्मीदवार 15 जून से 30 जुलाई के बीच आवेदन कर सकेंगे। कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग की ओर से जारी अधिसूचना में कहा गया है कि संयुक्त सचिव का पद भारत सरकार के उच्च प्रबंधन में एक महत्वपूर्ण पद है।

संयुक्त सचिव नीतियां बनाने के साथ सरकार के कई कार्यक्रमों का क्रियान्वयन भी करते हैं। इसमें कहा गया है कि सरकार को 10 क्षेत्रों राजस्व वित्तीय सेवा, आर्थिक मामले, कृषि, सड़क परिवहन एवं राजमार्ग, पोत परिवहन, पर्यावरण, नवीकरणीय ऊर्जा, नागरिक उड्डयन और वाणिज्य के क्षेत्र में विशेषज्ञता रखने वाले उत्कृष्ट लोगों की जरूरत है।

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