गीतांजली, पीएनबी और ओबीसी निवेशकों के लिए बुरी खबर

गीतांजली, पीएनबी और ओबीसी निवेशकों के लिए बुरी खबर
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लगभग दो दशकों में घोटालों, धोखाधड़ी या कीमतों में बढ़ोतरी करने वाली लगभग एक दर्जन से अधिक कंपनियों ने अपने सभी समय के उच्च स्तरों के आंकड़ों के मुकाबले बाजार मूल्य के 90 प्रतिशत से अधिक का नुक्सान उठाया हैं। उदाहरण के लिए मुंबई से पूर्व स्टॉक ब्रोकर केतन पारेख को भारतीय शेयर बाजार में घोटाले में शामिल होने के लिए दोषी ठहराया गया।

1998-2001 की अवधि के दौरान पारेख ने गुजरात-आधारित माध्वपुरा मर्केंटाइल को-ऑपरेटिव बैंक सहित बैंकों से ली क़र्ज़ की बड़ी रकम का उपयोग करके कृत्रिम रूप से चुनिंदा शेयरों के दामों को धांधली की जहां वह एक निदेशक थे। इसी तरह, 2009 के 2-जी टेलीकॉम स्पेक्ट्रम घोटाले में यूनिटेक और डीबी रियल्टी के प्रमोटरों का नाम था, उनके बाजार के मूल्य का 85 प्रतिशत से अधिक को खो दिया।

विशेष केंद्रीय जांच ब्यूरो कोर्ट ने दिसंबर 2017 में 2-जी टेलीकॉम स्पेक्ट्रम घोटाले में सभी अभियुक्तों को बरी कर दिया था। इक्विनोमिक्स रिसर्च के संस्थापक और प्रबंध निदेशक जी चोक्कलिंगम बताते हैं कि घोटाला कंपनियों में शामिल निवेशकों का आत्मविश्वास हिला देता है, जिसके परिणामस्वरूप शेयरों पर मार पड़ती है। ओरिएंटल बैंक ऑफ कॉमर्स ने 12 फरवरी को अपने 52 सप्ताह के निचले स्तर पर 92.50 रुपये के दायरे में गिरावट दर्ज की थी।

रिपोर्ट के मुताबिक सीबीआई ने दिल्ली स्थित एक ज्वेलर के खिलाफ सरकारी बैंक की शिकायत पर मुकदमा दर्ज किया था। गीतांजलि जेम्स और डी. कुलकर्णी डेवलपर्स के निवेशक भी कुल बाजार पूंजी का 96 फीसदी गंवा चुके हैं। पंजाब नेशनल बैंक में 114 अरब रुपये के घोटाले में गीतांजली जेम्स के प्रबंध निदेशक मेहुल चोकसी का नाम भी है। इस घोटाले का केंद्र बिंदु देश का दूसरा सबसे बड़ा ऋणदाता पीएनबी बैंक है, जिसने 14 फ़रवरी को सार्वजनिक क्षेत्र में घोटाला होने से इसकी कीमत 30 फीसदी से घटकर 113 रुपये दर्ज की थी।

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