जानिए कैसे पुलिस से पहले हिन्दू संगठनों के पास पहुँचती है ‘लव-जिहाद’ की खबर

जानिए कैसे पुलिस से पहले हिन्दू संगठनों के पास पहुँचती है ‘लव-जिहाद’ की खबर
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हाल ही में उत्तर प्रदेश के बागपत जिले में हिंदू युवा वाहिनी के कार्यकर्ताओं ने गुंडागर्दी करते हुए कोर्ट परिसर में शादी करने पहुंचे प्रेमी जोड़े की कथित रूप से जमकर पिटाई की। इन कार्यकर्ताओं का कहना था कि यह ‘लव-जेहाद’ का मामला है। इस घटनाक्रम के दौरान कोर्ट में मौजूद पुलिस मूकदर्शक बनी रही।

‘लव-जेहाद’ रोकने के लिए पिछले एक साल में कई हिंदू संगठनों द्वारा हिंसा के मामले सामने आएं हैं. लेकिन इस सब के बीच एक सवाल उठता है कि आखिर इन संगठनों को ये सब जानकारी मिलती कहां से है। पश्चिमी उत्तर प्रदेश में रेस्तरां में काम करने वाले लोग हिंदू संगठनों के जासूस के रूप में काम कर रहे हैं। शामली, मुजफ्फरनगर और बागपत के वीएचपी संयोजक विवेक प्रेमी ने कहा कि हम पश्चिमी यूपी में ‘लव जेहाद’ रोकने में काफी कामयाब रहे हैं।

किसी भी मुस्लिम लड़के और हिंदू लड़की के बीच संभावित रिश्ते की खबर हमें सबसे पहले मिलती है। यहां तक की पुलिस को भी इसकी जानकारी नहीं होती। उन्हें (पुलिस) भी नहीं पता कि हमें जानकारी कहां से मिलती है। उन्होंने आगे कहा कि पश्चिमी यूपी में रेस्तरां में काम करने वाले वेटर, कैशियर, सफाईकर्मी आदि हमारे नेटवर्क में हैं और हमें इन्हीं से ‘लव-जेहाद’ से जुड़े मामलों की जानकारियां मिलती है। पिछले 15 दिनों में हमने शामली में ‘लव-जेहाद’ के चार मामले पकड़े हैं। इनमें से दो हमने रेस्तरां में पकड़े हैं।

प्रेमी ने कहा कि हमने पहले रेस्तरां के मालिकों से इस बारे में बात करने की सोची, लेकिन फिर हमें लगा कि वो हमारी मदद नहीं करेंगे क्योंकि वो अपनी जगह पर हंगामा पसंद नहीं करेंगे। इसलिए हमने कर्मचारियों की ओर रुख किया। कुछ लोग डर रहे थे कि अगर उनके मालिकों को पता चल गया तो उनकी नौकरी जा सकती है। ऐसे में हमने उन्हें सुनिश्चित किया कि उनकी पहचान उजागर नहीं की जाएगी। ये उसी तरह है जैसे पत्रकारों के सूत्र होते हैं।

बजरंग दल और वीएचपी के सदस्यों ने बताया कि सूत्र तौर पर बस चालकों से लेकर वेटर, अधिवक्ताओं, किसानों और कभी-कभी मजदूरों पर भी निर्भर करते हैं। उन्होंने कहा कि हर साल हजारों लोग अपने संगठन का हिस्सा बन जाते हैं, लेकिन जब से सभी को कोई पद नहीं दिया जा सकता है, उन्हें सूचना देने वाली भूमिका दी जाती है।

पश्चिम बंगाल के संयोजक बलराज डुंगर, बजरंग दल ने कहा कि हमारे पास ऐसे लोगों का नेटवर्क है जो हमारे सदस्य हैं और जो चुपचाप काम करते हैं। नवंबर से दिसंबर 2017 तक शामली में एक अभियान चलाया गया था। कम से कम 8,000 लोग संगठन में शामिल हुए, लेकिन उन सभी को एक पद नहीं दिया जा सकता है। इसलिए कुछ को सूचना देने वाली भूमिका दी गई है।

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