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परम्परा के नाम भेंट चढ़ते मासूमों को बचाने में नाकाम सूबे की भाजपा सरकार, नहीं रुक रहा बाल-विवाह

अक्षय तृतीया के मौके पर राजस्थान, मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़ समेत देश के कई हिस्सों में बच्चो की ज़िंदगी के साथ खिलवाड़ होता है। ना जाने कितने मासूम बच्चे तमाम कोशिशों के बावजूद परंपराओं की भेंट चढ़ जाते हैं।

परंपरा के नाम पर अक्षय तृतीय के दिन सैंकड़ों बाल विवाह होते हैं। हालांकि इस पर पुलिस प्रशासन की कड़ी नज़र होती है लेकिन वो बाल विवाह पर लगाम नहीं कस पा रही है।

राजस्थान में तो बाल विवाह एक बड़ी कुरीति है जो तमाम कोशिशों के बाद भी थम नही रही है। हालाँकि पुलिस-प्रशासन की सख्ती करने के बाद अक्षय तृतीया के मौके पर 25 बाल विवाह रोके जा सके हैं।

लेकिन प्रदेश में कितने बाल विवाह हुए इसका कोई आंकड़ा नहीं है। बाल विवाह रोकने के सबसे ज़्यादा मामले टोंक ज़िले में आए हैं।

प्रशासन के तमाम जागरुकता अभियान और  समझाइश के बाद भी प्रदेश भर में अक्षय तृतीया के मौके पर बड़ी संख्या में बाल विवाह के प्रयास किए गए।

सरकारी रिकॉर्ड के अनुसार शुक्रवार को टोंक में 11 बाल विवाह रुकवाए गए और माता-पिता को बाल विवाह नहीं करवाने के लिए पाबंद किया गया। वहीं सीकर, अलवर, सवाईमाधोपुर व प्रदेश की राजधानी जयपुर में भी कई बाल विवाह प्रशासन ने रुकवाए।

जबकि राजस्थान के ​कई जिलों में बाल विवाह की सूचना पर पुलिस के पहुंचने से पहले ही दुल्हा-दुल्हन को गायब कर दिया गया।

गौरतलब है कि राजस्थान देश के चुनिंदा राज्यों में शामिल है जहां बाल विवाह सबसे अधिक होते है।

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